आधुनिक काव्यधारा का सांस्कृतिक स्त्रोत | Aadhunik Kavyadhara Ka Sanskritik Strot

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Aadhunik Kavyadhara Ka Sanskritik Strot by केसरी नारायण शुक्ल - Kesari Narayan Shukl

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पूर्वाभास जानते थे कि सब कुछ अनिश्चित हैं। यदि आज सिर पर ताज है तो कल तठ्वार । यदि आज का राजा कछ रादद का मिखारी $. मुसीसे बन जाय तो उन्हें कुछ आश्रय न होगा । इसीसे ये दरवारी “यावत् जीवेत्‌ सुख जोवेच” को मानते श्रे। इसीसे इन्होंने मनमाना व्यय किया । इसीसे इन्होंने लूटा और लुटाया तथा स्वयं छुद गए । सौंदर्य के स्वप्न देख गए और उनको सत्य चनाया गया । इस कृत्रिम समाज का आदर्दा ही था साौंदियें और प्रेम । मावलोक का सौंदय काव्य में मिला । कवि पुरस्कृत हुए । नाद-सौंदर्य संगीत में ढूँढ़ा गया, संगीतकारों पर कंचन ' की चर्पी हुई । वर्ण-सौंदय की चित्रकला में खोज हुई, चित्रकार की चारुता पर ददय विमुस्ध हुए । जद़-सॉदय निखरा वास्तु कला में । दिलपी संमानित हुआ । छेकिन इस समाज के मादक कि 1 ह नि $ स+ कप ५० संगी को पूर्णता मिली नारी के सौंदय श्ीर प्रेम में । काव्य, संगीत और चित्र तीनों इसके ऋणी हैं, नारी तत्काछीन सौंदय॑-मावन। ह ष् शत की चरम अभिव्यक्ति को पूण परिणति मान छी गई । सादयं मयी नारी के लिये क्या नहीं किया इम समाज ने । युद्ध हुए समाज के चंधन डिथिल कर दिए गए | सारी का जीवन, ना कब 2» 0. ८+ और संगी ५७. लि का प्रेम, नारी का सौंदयं चित्र, क्राव्य और संगीत में अंधि हुआ 1 अभिसारिका के चित्र, नायिका-भेद, नलखदिख, छोर बसंत के गीत और रागमाला के चित्र, इन . सबमें नारी जीवन हो तो चर्णित-चित्रित है । समान में सौंदर्यपूर्ण नारी मूल्य और महत्त्व था । सींदय से दीपित नारियों का झा और समाज दोनों पर प्रभाव था, इनमें से कुछ में तो * बाह्य सौंदयं था और कुछ में सौंदय के साथ प्रतिभा भी




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