औद्योगिक संगठन एवं सेविवर्गीय प्रबन्ध | Audyogik Sangathan Awam Sevi Vargiya Prabandh

77/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Audyogik Sangathan Awam Sevi Vargiya Prabandh by रमेशचन्द्र अग्रवाल - Rameshachandra Agrawal

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about रमेशचन्द्र अग्रवाल - Rameshachandra Agrawal

Add Infomation AboutRameshachandra Agrawal

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
२. | उद्योगों का वर्गीकरण (014688ि0#000 01 पतेफडट3)-- प्रकृति के शभ्रनुसार उद्योगों को निम्नलिखित पाँच भागों में विभाजित किया जा सकता है :-- (१) उत्पत्ति अथवा, खाद्य उद्योग (0606८ 106०५%)--एस वर्ग में वे उद्योग सम्मिलित होते हैं जो भूमि से कृपि सम्बन्धी क्रियार्य॑ करके खाद्य वस्तुयें पैदा करते हैं, जेसे कांप उद्योग, वन उद्योग तथा मत्स्य उद्योग, भ्रादि । यह उद्योग हमार लिये खाद्य पदार्थ तथा अ्रन्य 'उद्योगो के लिए आवश्यक कच्चे साल का उत्पादन करता है । इसी विचार से कुछ विद्वानों मे इस 'प्रारम्भिक” (7100४) उद्याग के नाम स मा सम्बोाघत किया है । (२) निष्कबण उद्योग (छ8श्800ं४८ 100४ %9)--जैसा कि इसके नाम से ही विदित है, इसके श्रन्तगंत भूमि से खनिज पदार्थों का निकालना होता है । दूसरे शब्दों में, प्रकृति की गोद से मानवीय प्रयत्नों द्वारा ्राप्त की गई वस्तुयें अथवा पदार्थ, जो प्रत्यक्ष अथवा अ्रप्रत्यक्ष रूप से प्रयोग में लाये जायें, इस वर्ग के अन्तर्गत श्राते हैं, जेमे--खनत कम, मछली पकड़ना, शिकार खेलना तथा जंगल साफ करना, झादि । (२३) निर्माणी उद्योग (तदतधविएपत हु दिलेघडपि)-ननिर्माणी उद्योगों से तात्पय ऐसे उद्योगों से है जो वस्तुप्रों का ूप परिवर्तित कर दत हूं । दूसरे शब्दों में, जब कल्प साल ग्रथवा श्रद्ध -पवके साल को पूर्ण तथा पक्के माल में परिवातित कर दिया. जाय, तो उसे 'निर्माणी उद्योग' कहेंगे, जैसे--लोह एवं इस्पात उद्योग, शवकर उद्योग, वस्त्र उद्योग आदि । निर्माशी उद्यांग को पुन: निम्न चार भागों में विभफ्त किया जा सकता है--(श्र) संयुक्त उद्योग (59010016100 पाठ0ड079)--इस के झन्तगंत विभिन्न कच्चे पदार्थों का सम्मिश्रण करके नये पदार्थ को निर्माण किया जाता है, जैसे--सीमेण्ट, प्लास्टिक, साबुन आदि का निर्माण । (ब) प्रक्रिया उद्योग (0०659 [06प5घ%)--दसके श्रस्तगंत कच्चे पदाथ को विभिन्न उत्पादन प्रक्रियाओं में से निकाल कर निर्मित पदार्थ अधवा माल का निर्माण किया जाता है, जैसे--चवीनी उद्योग, ऊन उद्योग, इस्पात उद्योग, झादि । (स) विश्लेषणात्मक उद्योग (5.00191081 पते) “इसके ध्रन्तर्गंत एक ही कच्चे पदार्थ से विश्लेषणात्मक क्रियासओों द्वारा स्रमेक उप-पदार्थों'का निलांग किये जाता है, जैसे--पेट्रोलियम शुद्ध करके पेट्रोल, गैसीलिन, डीजल तेल, मिट्टी का तेल आदि तैयार करना । (द) एकीकरण उद्योग (101०छा::106 00519) इसके अग्पर्गत प्रक्रिया तथा एकीकरण दोनों ही क्रियाप्ों का समन्वय स्थापित करके निर्माण काय सम्पन्न किया. जाता है, जेसे रबई एवं टायर । (5४) संग्रह उद्योग (/558ा00प08 10009 इसके अस्तगंत उन उद्योगों को सम्मिलित किया जाता है जिनमें किसी वस्तु का निर्माण उसके विभिन्न भागों को प्राप्त करके एवं उन्हें जोड़कर किया जाता है, जंस-- साइकिल उद्योग, स्कूटर उद्योग, टाइपराइटर उद्योग, विशाल यन्त्र उद्योग श्रादि । भारत मे विदेशी सहयोग से विभिन्न संग्रह उद्योग कार्य कर रहे हैं । कि (४५) रचनात्मक उद्योग (00०05700प४७ ाउंप5(7%)---रचनात्मक उद्योग से 'तात्पयं ऐसे उद्योगों से है जो वस्तुम्नों का रुप पारिवतित करके उन्हें झधिक उपयोगी तथा सुन्दर बना देते है, जेसे--भवन-निर्माण, सड़क निमाण, नहर तथा बाँध निमाण आदि । (हा) संगठन का श्रथे (१1600 0 (पक्ाडक्प01)-- किसी भी कार्य को प्रारम्भ करने से धूव॑ उसका उचित “संगठन” कर सेना परम झ्ाव- श्यक होता है । उदाहरण के लिए, मान लीजिए कि एक हॉकी का मैच हो रहा है । उसमें एक टीम के खिलाड़ी तो सुव्प्रवस्थित रूप से श्रपने-प्रपने स्थानों पर खड़ होकर खेल रहे,हैं प्र दूसरी




User Reviews

  • Baldau Jaiswal

    at 2020-05-12 11:57:41
    Rated : 7 out of 10 stars.
    "Add page"
    " Audyogik sangathan aur sevivargiy book " Usefull . But page 67, 201, 219, 220, 221, 222, 243, 244, 245, 313 nahi hai. Agar upalabhtha Ho to page ko add karane ki kripya kare
Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now