श्री भागवत दर्शन भागवती कथा भाग - 58 | Shri Bhagwat Darshan Bhagavati Katha Bhag - 58
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
4 MB
कुल पष्ठ :
228
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)( हरे )ारतीय सस्कृति के विरुद्ध ही क्यों न हो, उसे वद्द घलपूव॑ंक
सबके सिर पर योपना चाहते हैं 1
तीर्बराज प्रयाग में मददाकुम्भ के पवित्र अवसर पर गौ-रक्षा
से पक्तपात्तो सभी दलों तथा सज्जनों ने मिलकर एक, “गी-हत्या
निरोध-समिति” बनायी, उसकी श्योर से सम्पूर्ण कुम्भ मेले में भो
. रक्षा प्रचार किया गया, साहित्य वितरित हुआ, गो-प्रदर्शिनी हुईं,
जौ-माता के लिये लाखों नर-नारियों ने उपवास किया, साधुश्रों
को शाही के साथ सजी-प्लजायी गौएँ निकाली गयीं; शोभा यात्रा
. निकाली, स्पान-स्यान पर गी-रक्ता-सम्मेलन हुए तथा और
भी सै-माता की रक्षा के विभिन्न कार्य हुए। कहना 'चाहिये
सम्पूर्ण कुम्भ मेला गो-रत्ता-झान्दोलन के ही रूप में परिणत
हो गया है। उसी सम्मेलन में यह भी निश्चय हुआ कि सरकार
जे यदि 'आगार्म। जन्माष्टमी तक गो-बघ चन्द न किया, तो प्रबल
श्यान्दोलन करके कोई रमन उपाय किया जाय! भगवान् करें
में 'पनी ही सरकार के--जिसे हमने झपने रक्त से सींचा है--
जिसके लिये हमने जेलों की यातनाएँ केली हैं, उसके विरुद्ध
हमे उग्र उपाय न करना पढे । पर यदि हमें विवश द्ोना पढ़ा,
तो हम इसके लिये भी न चूकेंगे । इसलिये हमें 'भी से जनमत
“जैयार करके जन-जाएूति का काम करना चाहिये । इतने काम हमें
करने हैं. द--
(९) स्थान-स्थान पर-गो हृत्या-सिरोध-समितियों की स्थापना करें ।
(स् गौ-माता के लिये माण देने के लिये गी-सेवकों से प्रतिज्ञा-पत्र
मरायें ।
(रे) जो प्राण न दे सकते हो, थे साधारण-सेवर्कों के नियमों के
है. म्रतिज्ञा-पत्र को भरकर साधारण सेवक चने,
हि) सो-सेवा सम्बन्वी साहित्य-प्रचार, सभा, प्रभात-फेरी, शोभा-
1. यान झादि में सक्रिय भाग लें ।जि
प्रै
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