राम चरित मानस | Rama Charita Manasa

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( हे ) ७ रामलला नददछू--इसमें २० साहर छंद हैं जिनमें शरीरामजी ' के विवाह में, जनकपुर में नखें में मद्दावर देते समय काशल्या झादि का सदुददास्य किया है । - ८ वैराग्य संदीपनी--इसमें ५२ छंदां में संतस्वभाव, संत-म- हिमा एवं शांति का वर्णन है । जान पड़ता है, इसे विरक्त होते ' समय गेाससाइ जी ने बनाया है। & वरयबे रासायण--इसमें ७४ छुंद हैं, जिनमें रामचरित्र का स्फुट घर्यन है । कहते हैं इस श्रंथ को गोसाई जी ने झापने मित्र नवाब स्वानखाना फे मनारंजनार्थ बनाया था । शेोसाई जी ने नर-चरित्र न लिखने की प्रतिज्ञा की थी, इस कारण उन्हेींने नवांय का भी मनेरंजन रामचर्त्रि ही से किया 1 १० पार्वती-मंगल--इस में मद्दादेव-पावंती का विवादद.चर्णन है। इसमें साहर के १४८ तुक श्र १६ छुंद है । इसको गेएसाइ जी ने संचत्‌ १६४३ फागुन खुदी २ गुरूवार को चनाया। ११ जानकी-मंगल-- इसमें श्री सीताराम-चिवादद का वर्णन है । इसमें १४९ सादर शोर २४ छंद है । यद्द पार्वती मंगल का सम साम- यिक जान पड़ता है। कर . १२ विनय पत्रिका-इसमें राग रागिनियें में गोसाइंजी ने विनय के पद लिखे हैं । इसमें देवी, 'देवता, दशाबतार, ती थे, देवालय झादि की स्तुति झर चर्णन है। इसे गासाई जी ने काशी में ही लिखा । इस अंथ में उनकी कवित्व शक्ति का पूर्ण परिचय मिलता है | गोासाईं जी के अंधे में ययपि उत्तर भारत की झामीण भाषा की ही प्रघानता है, पर भावों के व्यक्त करने में उन्हींने किसी भाषा विशेष का चंधन नहीं रक्‍्खा | उनका शब्दविस्यास इतना' सरल ऋौौर वो घगस्य है कि उनके काव्य.वाल वृद्ध चनिता सब को प्यारे हैं और भाव इतने गंभीर हैं कि बड़े बड़े पंडितों का माहित कर




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