भजन मंडली | Bhajan Mandali

5 5/10 Ratings.
1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Book Image : भजन मंडली  - Bhajan Mandali

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about अज्ञात - Unknown

Add Infomation AboutUnknown

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
(१४ ) मजा उड़ावें । लड़की जन्म रुलानेबाले ॥२॥ रांड नचा अपशकुन बनायें ' कुर्बानी घन देह कराबें । खुश दोकर घन धर्म गमावें ' मरकर दोजख_ जानेवाले , ३ ॥ जो [ आा- तिशबवाजो छुड़बावें ' खुश हो सालमे आा ग लगावें । हिंसा करके पाप कमाें । घूनी चाम सूंघनेबाले । ४ मेठो कुरीत तम तज दुन्द' मेंठो या से शुभ सुख“चंद्र,, थंघे में ना होदो अ'घ। घरसे वे सुधर' हनेवाले ॥ '्ै। ९४ मअजन ( वेश्या खंडन ) कभी मत करना यार भूलके रंडीवा- जी ॥ टेक ॥ आतिश सुजाक हो ज़ात्रे। गठिया परमेह खताके.। मरें कर होहा- फ्रार ॥ भूल० ॥ छल करके घन हर लेवे। हर $ |




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now