श्री नानकविनय | Shree Nanakavinay
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
42
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[ रेश, ]कछाडि-सभ भागेश २ ॥: कचउ कही या
मन वंउर कउ .दस सिउ ने लगायो।
दोनानांध सकल से भंजन॑ जसु ताकी
विसंरायो ॥३॥ 'संगोन' पक जिउ भन्मी नें
सघऊउं बहत जतंन॑ मे कीनंउ ॥ नांनेंकं
लाज बिर् कों राखंइ नीम 'तुददारंद
लोनउ ॥8४॥ ॥२३॥' *.. - 2 शाहमनरे गद्मी न.गुरु उपदेस। करी
भयो जउ॒सड सडाओ भगवर कीनी
भेस ॥१॥ रच ॥ सांच छाडि के भठहि
लागिओ जनम अकारध खोओ । “कर
परपंच उदर निज पोखिआओ पसु की निआई
सोआओ ॥२॥ रास भजन की-गति.नद्दी
जानी मा दाधि विंकाना। उरसिं रहो
विखिअन संँगि वउरानाम रतन बिस-
राना ॥३॥ रन्मो अचेतु न चेतिआओ. गोविंद
'विरघा अउध सिंरानो ॥ कह नानक अरि
बिरद पानउ भरे सदा परानी-॥द॥र8॥
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