श्री नानकविनय | Shree Nanakavinay

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Shree Nanakavinay by गुरु तेगबहादुर - Guru Tegabahadur

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[ रेश, ] कछाडि-सभ भागेश २ ॥: कचउ कही या मन वंउर कउ .दस सिउ ने लगायो। दोनानांध सकल से भंजन॑ जसु ताकी विसंरायो ॥३॥ 'संगोन' पक जिउ भन्मी नें सघऊउं बहत जतंन॑ मे कीनंउ ॥ नांनेंकं लाज बिर् कों राखंइ नीम 'तुददारंद लोनउ ॥8४॥ ॥२३॥' *.. - 2 शाह मनरे गद्मी न.गुरु उपदेस। करी भयो जउ॒सड सडाओ भगवर कीनी भेस ॥१॥ रच ॥ सांच छाडि के भठहि लागिओ जनम अकारध खोओ । “कर परपंच उदर निज पोखिआओ पसु की निआई सोआओ ॥२॥ रास भजन की-गति.नद्दी जानी मा दाधि विंकाना। उरसिं रहो विखिअन संँगि वउरानाम रतन बिस- राना ॥३॥ रन्मो अचेतु न चेतिआओ. गोविंद 'विरघा अउध सिंरानो ॥ कह नानक अरि बिरद पानउ भरे सदा परानी-॥द॥र8॥




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