युग पुरुष महात्मा गांधी भाग 1 | Yug Purush Mahatma Gandhi Bhag 1

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Yug Purush Mahatma Gandhi Bhag 1 by प्रो० भ० प्र० पांथरी- Prof. B. P. Panthariमनोहरलाल - Manoharlal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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युग-पुरुष करोब डेढ़ सो वर्षोतक सारतका उत्तर पश्चिमी प्रान्त परशियाके साधाज्यका अंश बनाही रहा । सारतके इस प्रान्तकों पाकर परशिया अपनेको धन्य समसने लगा । और बात थी ठीक थी, क्योंकि अकेठा भारतीय प्रान्त परशियाकों साठाना ३०० टेलेन्ट सुबण अथातू करीब १२५०० सन सोना दिया करता था । इतना सोना परशियन साश्नाज्यके अन्य २० प्रान्त सिलकर भी मुश्किठसे दे पाते थे । यह अपार सोनाही था जिसने परशियन लोगोंको ही नहीं; अपितु कई एक दूसरे विदेशी लुटेरोंको भी हसारे मुल्कपर घावा करनेके लिए समय समयपर न्योता दिया है | परशियनोंके वाद चौथी झताद्दि ई. पू. में यूनानियों ने भी हमारे इसी वैभवकों लूटनेके छिए भारतबषंपर हसला किया था। अलक्ेन्द्र (सिकन्द्र) इस यूनानी हमलेका नेता था । सन्‌ ३२७- ३०२६ ई० पू०में बह काबुलके द्रबाजेसे हमारे मुल्कमें घुसा । उस समय उत्तर पश्चिसमें बहुतसी श्रजातंत्र रियासतें थीं ! यद्यपि शासन आर व्यवस्थाके विचारसे ये रियासतें बहुतहदी सुशासित और विकसित थीं; किन्तु इनमें परस्पर कोई मेछ न था । अपने राज्य अथवा रियासतके प्रेमके सिवाय इनमें पूर्णदेशीय राष्ट्रीयवा न थी । इसलिए विदेशी आक्रमणकारीके खिलाफ वे कोई संयुक्त मोचों कायम न कर सके । परिणाम यह हुआ कि सिकन्दरने एक-एक करके सारे प्रजातंत्रोंको विनष्ट कर डाला । किन्तु पंजाबके महाराज पुरुसे विजय हासिल करनेमें उसे काफी मूल्य चुकाना पड़ा था । अतः पुरुके पौरुष और बलसे थककर एवं डरकर अलक्ेन्द्रकी फोजें आगे बढ़नेका साहस न कर सकीं और पंजाबसे ही वापिस हो गईं । लौटते समय अलदेन्द्र श्ठ




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