चौराशी वैष्णवन की वार्ता | Chaurasi Vashnav Ki Varta
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
98 MB
कुल पष्ठ :
384
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(9०) चारा ही.
| तीन वस्तु मांगी एकती मुखरताको दोष जाय दूसर |
। मागेको सिद्धांत समझों तीसरे मेरे गुरूके घर
। पघारो तामें दोय वस्तु दीनी यरूके घर पधारवेकी ।
| नाहीं कीनी बढुर बढ्रिकाश्रमते आगे पधारें जहां
जीवक गम्य नाहा हे तहां वेदव्यासजाकां स्था
है तहां पधारे तब कृष्णदाससों कह्यौ जो तू ठाडो
| रहियो तब श्री आचायजी महाप्रशू आगे पधारे
| तब वेदव्यासजी साम्दे आये सो श्रीआचायजी
। महाप्रझननकों अपने घाममें ठे आये पाछें वेदव्या
। सजीने श्रीआचायजी महाप्रश्ननसों कहो जो.
| तुमने श्रीमागवतजीकी टीका कीनी है सो मोको
| सुनावो तब श्रीआचायजी महाप्रभूनने जुगठभी-
|
|. सो छोक़-वामबाइुकृतवामकपोठोवडितरश्ूधरापिं तवेणुं
कोमलांगुलिनिराश्रितमागंगा प्यइरयतियत्रमु झन्दः ॥3 |
| सम्प्रणभया तब वंदव्यासजीने बीनती करी जो मैं
| या भागवतके _व्याख्यानकी अब धारना कार
सृकत नाहां तातें अब क्षमा करो पाछें श्रीआचा-
| यजी महापम्भूनने वेदव्यासजीसों कहो जो तुम
| वेदांतके ऐसें सूत्र कहा कीये जो वादप
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