स्वास्थ्य साधना | Swasthaya Sadhana

Swasthaya Sadhana by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( है£ ). हि 'भे किया और भाज- दकीमी घोर लिया, उस समय ज्ञानका दीप.दुतक पहुँची है पारसिल्सस था ! इन्होंने इकीमीका भी यथेष्र नके लिये भी परन्तु विक्रमंकी सोलहवीं शताव्दीमें डे । उधर नामका एक प्रतिभाशाली वैद्य जर्ममनीमें हुआ । जिद उसके मूंदकर गालीजु और अवूसेनाके अयुयायित्वका घोर -घारके किया । उसने खयं रखायन विद्याका अनुशीलन कि». प्रकृतिनिरीक्षणपूर्वक नैसर्गिक चिकित्साका प्रचार किया, साथ ही रासायनिक घातव यौगिक ओषधियोंके प्रयोगकी युरोपमें इसीने पदले पहल नेव डाली । जहां भारतवर्षमें राष्ट्रिय दासत्व भर हकीमी और डाक- टरीकी वृद्धि, उन्नति और प्रचारने वैद्रकको राज्याश्रयसे चेचित रखा, वहां युरोपमें गत तीन चार सौ चर्षोमें भौतिक, रसायन और जीव-विज्ञावकी खोजों और आविष्क्ारोंने सं सारका कायापलट कर दिया और हर जगह डाकटरीको राज्याश्रय दिलाया । जीवाणु- विज्ञानने नये सिद्धान्त जन्माये । _अणुवीक्षण यंत्रने हमारी दृष्टि बड़ी पैनी और सूक्ष्म बना दी। शब्य-विकित्सा और शरीर _व्यवच्छेदशास्त्र अपनी उन्नतिके शिखरपर पहुँचे । आयुर्वेद्की सेवपर जो डाकटरी खड़ी की गयी थी, आज इतनी बदल गयी है कि पहचानी नहीं ज्ञाती । पाश्चात्य सभ्यताने ओर वैज्ञानिक आविष्कारोंने जैसे जैसे जीवनके ढंग बदले वैसे ही वेसे डाक- टरीके रूप भी बदलते गये । यदांतक कि आज जिस तर्द डाकटरीकी चम- त्कारिक उन्नति




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