अर्थशास्त्र के सिद्धान्त | Arth Shastra Ke Siddhant
श्रेणी : अर्थशास्त्र / Economics

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
15 MB
कुल पष्ठ :
929
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)10 अधशास्त्र के दिह। उनन बहा है दि भवशास्त एक सामाजिक विदान है. धन कर विदान नहा
और इसके अध्ययन का प्रमुत दिपय सनुप्य हे । अत मानव झमुख है, घन गौण है
मागय ने दस घारणा वा स्पष्ट करन हुए जिला हैं. “झयशाहत्र एक भोर ता घर
का झप्ययन है. तथा दूसरों झोर जो झधिव सहरवपूर्ण है. भपुष्य के भप्ययन का
एक् भाग है। 1
2 सामाप मनुष्य नी श्ािक जिदाया का ध्रप्ययन.. माशल ने इस बा
पर जोर दिया कि झयुशास्त्र सममान्य मदुप्य को माथिक शियामों दा म्रव्ययन करते
है। एसा मजुप्म सामाजिक वास्तविक तथा साधारण प्राखी होता है । इस प्रका |
एतम स्मिथ तथा उसके अतुयाधियों ढाय बल्पित ब्राधिक सनुप्स' (०८०स0प्रण।
पाणश) दो माएल ने श्र'्लाचना वी । उसने स्पष्ट शल्ता से वहां... 'साघुनिक अप
शास्त्री का करव्य चास्तदिर दौर एसे मनुष्य के झव्ययन से है जा रक्त घीर मार
को बना हैं. किसों अमृत शोर झाथिव सनुध्य के अध्ययन से नो । *. वास्तव
जगत से हम यह जापन हैं कि मनुष्य केव निर सवाय से ही प्रभावित नहां होता
सतिकता धीर सामािक प्राचार विचार से भ' प्रभावित होता है।3. अयशाहय सानव जीवत के सामा य व्यवसाय वा भ्रष्मयत है... माप
के अनुसार घन भडित करने वी दिधि पीर उसका उपयोग श्रथगास्त्र का वियय नै
सामान्य म्यडमाय का सात्पय मनुष्य बी प्राथिक जिदाग्ा स है । मनुष्य की
शामिक धौर राजनीतिक जिपाय़ों की अझपसा आधिक क्रिया का हो झथशास्त्र
अध्ययन स्या जाना चाहिए ।है
ही4. नौतलिक कल्याण का भष्ययन . धथशास्त मे मानव कल्याण
सध्ययन किया जाता है । मथगास्थि वा. उनेस्य मानव कल्यागा में वद्धि अरनों
परन्तु प्रयरोस्त्र मे भानव उस्योल जे सभी पहेजुआं वो नहीं चन्वि ब्त झ!
या भौतिव पल का हो अध्ययन किया जाता है। झषशास्त्र एस भौतिक साधने
प्राप्ति तथा सप्रभांग का झययते बरदा हे नितस सॉनव अल्याणा मे व
होती है ।5 मुठ नोतिक कल्यासा का मापर. सार्शत ने सानव के भौतिर कस्याण
श्रप्ययन पर दिशेष बल टिया रया है। पाशू इसे प्नाथिक के यारा का नाम देत हैं
यर भौनिक कल्मास मुठ के माध्यम स झादा जाता है । माल भौर पीयू हर
मुद्रा के माध्यम स भाविर दियाप्ा व भोनिक कयागा की मापने के समयत्र हैंनै नीपफ्ड पड एव पी छा. हाल ठ डाघएक एँ भी आप 00 8 0९1 त।
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