आश्चर्य - घटना | Aashchrya Ghatana
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
27 MB
कुल पष्ठ :
484
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)तीसरा परिच्छेद १
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सकता ? विवाह के समय मन्त्र द्वारा जो सम्बन्ध जोड़ा
जाता है उसकी अपेक्षा कहीं बढ़कर सम्बन्ध मेंने इसकी साँस
पलटाकर इसके साथ जोड़ लिया है । मन्त्र पढ़कर इसके
साथ एक कत्रिम सम्बन्ध जोड़ना होता, किन्तु देव की अनु-
कूलता से जो सम्बन्ध यहाँ जुड़ा हे बह अकत्रिम है ।
कुछ देर में वधू चैतन्य होकर उठ बैठी। उसने ढीले कपड़े
सँभालकर मुँह पर घूघट डाला । रमेश ने पूछा--तुम्हें कुछ
मालूम है; तुम्हारी नाव और तुम्हारे साथ की खियाँ कहाँ गई' !?
उसने सिर हिलाकर जताया--नहीं ।
रमेश ने कहा--तुम कुछ देर तक यहाँ अकेली बैठ सको
तो मैं एक बार घूमकर उन सबकी खोज करूँ ।
बालिका ने इसका कुछ उत्तर न दिया। किन्तु उसका
सारा शरीर संकुचित होकर मानो बोल उठा--मुझे यहाँ अकेली
मत छोड़ जाना | ः
वधू के मन के भाव को रमेश समभ गया। खड़े होकर
: उसने बड़े ध्यान से एक बार चारों ओर देखा, पर कहीं कुछ
नज़र नहीं झाया । तब वह खूब ज़ोर से चिल्लाकर, आत्मीय
जनों का नाम ले-लेकर, पुकारने लगा। पर कहीं किसी की
कुछ टोह* न सिली । आखिर वह हताश होकर बैठ गया |
देखा, वधू दोनों हाथों से मुँह बन्द कर रोने की आवाज़ को
रोकना चाहती हैं। इससे उसका दम रह-रहकर फूल उठता
है और उसके मुँह से रोने की धीमी आवाज़ निकल पड़ती है ।
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