आश्चर्य - घटना | Aashchrya Ghatana

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Aashchrya Ghatana by रवीन्द्रनाथ ठाकुर - Ravindranath Thakur

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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तीसरा परिच्छेद १0सकता ? विवाह के समय मन्त्र द्वारा जो सम्बन्ध जोड़ा जाता है उसकी अपेक्षा कहीं बढ़कर सम्बन्ध मेंने इसकी साँस पलटाकर इसके साथ जोड़ लिया है । मन्त्र पढ़कर इसके साथ एक कत्रिम सम्बन्ध जोड़ना होता, किन्तु देव की अनु- कूलता से जो सम्बन्ध यहाँ जुड़ा हे बह अकत्रिम है ।कुछ देर में वधू चैतन्य होकर उठ बैठी। उसने ढीले कपड़े सँभालकर मुँह पर घूघट डाला । रमेश ने पूछा--तुम्हें कुछ मालूम है; तुम्हारी नाव और तुम्हारे साथ की खियाँ कहाँ गई' !?उसने सिर हिलाकर जताया--नहीं ।रमेश ने कहा--तुम कुछ देर तक यहाँ अकेली बैठ सको तो मैं एक बार घूमकर उन सबकी खोज करूँ ।बालिका ने इसका कुछ उत्तर न दिया। किन्तु उसका सारा शरीर संकुचित होकर मानो बोल उठा--मुझे यहाँ अकेली मत छोड़ जाना | ःवधू के मन के भाव को रमेश समभ गया। खड़े होकर : उसने बड़े ध्यान से एक बार चारों ओर देखा, पर कहीं कुछ नज़र नहीं झाया । तब वह खूब ज़ोर से चिल्लाकर, आत्मीय जनों का नाम ले-लेकर, पुकारने लगा। पर कहीं किसी की कुछ टोह* न सिली । आखिर वह हताश होकर बैठ गया | देखा, वधू दोनों हाथों से मुँह बन्द कर रोने की आवाज़ को रोकना चाहती हैं। इससे उसका दम रह-रहकर फूल उठता है और उसके मुँह से रोने की धीमी आवाज़ निकल पड़ती है ।




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