आचारंग सूत्र श्रुतस्कन्ध 1 | Acharang Sutra Shrutskandha 1

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Acharang Sutra Shrutskandha 1  by मुनि समदर्शी - Muni Samdarshi

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नाम ११४५ जे भिक्ख दोद्टि- ११६ जे भिकखू तिहिं-- ११७ जे ममाइय सइ -- ११८ जे हिं वा सद्धि- ११९ त 'श्राइत्तु न निद्दे- १२० त' जहा पुरत्थिमा्यो १२१ ते णो करिस्सामि-- १२२ तत परिककमेत -- १२३ त परिण्णाय मेद्ावी -- शेप ब श$ १२५ त॑ मिंक्खू सीयफास -+ १२६ त' से अद्दियाए-+ १२७ त सुणेह जद्दा-तद्दा --+ १२८ तथ्मो से एगया-- १२६ तत्थ खलु-- १३० ब लय + गण १३१ तत्थ-तत्थ पुढो-- ४६, १३२ तमेव सच्च -- १३३ तुमसि नास सच्चेव-- १३४ तिविहेख जावि से-- १३४५ ते समणुन्ने -- १७६ दुदओ छेत्ता नियाइ-- १३७ दुद्झो जीवियस्स-- १३८ दुव्वसु॒ मुखी असाणाएं-+ १२३४६ घस्ममायाणदह्द -- १४० घुव चेयू जाखणिज्जा-- श४१ नमसाणा वेगे-- १४२ सिज्माइता पहिलेहित्ता-- श्ण३ नित्तेद्ि -- श्य४ निद्देस नाइवद्टेज्जा -- रुड,) सून्न सख्या पृष्ठ सेख्य रश्दे फुल ऋ्ण्प ही व्द द्ू १ रह हे हर फ प्र हे के श.श२५ कि हद पथ ठि रे हि न पर ठ गा ि ु नह ध गौ ५ प्र प्र ही पद ः व न कद रे. शू नि टन ही डर अर रसिम सा दे 0 ब्ज न




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