कहानियाँ | Kahaniyan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( रे५ ) किन्तु भावुकता के मांगलिक रूप को हम कभी भुला नहीं सकते । क्योंकि मनुष्य में वही एक ऐसी तीघ्र कहानी में मावु- शक्ति होती है, जो उसके चरित्र को महान कता का शिव रूप बनाती है । संसार में जितने थी महापुरुष हुए हैं, सब सें किसी-न-किसी मात्रा में सावुकता झवश्य रही है। यह भावुऊता ही दो है कि हम दूसरों को अत्यधिक पीड़ा में देखकर रो पढ़ते हैं ! महान बविचारक णीता के भगवान छष्ण उस ससय कितनी भावुकता में लीन हो गये थे, जब उन्होंने अस्त्र अहण न करने दी प्रतिज्ञा भूलकर, महाभारत की रणभूसि में, भीष्म पर प्रहार करने के लिए, एक टूटे रथ का पहिया ही उठाकर, उन पर दे सारने की चेष्टा की थी ! भावुकता मनुष्य की दुबलता होकर भी उसकी श्त्यन्त सुकुमार भावना होती है । वह जिस शोर मुड़ जाती है; उसी ओर एक विशेषता और विचिन्नता उत्पन्न कर देती है। “उसने कहा था” कहानी में लददनाविंद के निम्नांकित चरित्र सें जो भाघु- कता मालकती दै उससे उसकी चरित्र-खष्टि कितनी सजीव हो जाती है ! “तेरी कुड़साई हो गई ” “हों, हो गईं । कब पु ड््त “कल--देखते नहीं, रेशम से कढ़ा हुआ सालू ।”' कहकर लड़की भाग गईं ! लड़के ने घर की राह ली । रास्ते में पक लड़के को मोरी में ढकेल दिया ' एक छावड़ीवाले की




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