कथा पंजाब खंड 2 | Katha Panjaba Khand 2
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
20 MB
कुल पष्ठ :
338
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)विद्रोह
गुरमुदध सिह जीत
सोमवार । सांध्यवेला । विंग कमांडर भाऊ राव रंगेकर गायत्री का जाप कर रहा था । उसने
आंखें मूंद रखी थीं और ध्यान इंश्वर की ओर लगा रखा था । शाम के छह वजे थे लेकिन,
घुप्प अंधेरा छाया था । दरअसल, पूर्वी असम के बिलकुल भीतरी हिस्से में सूरज जल्दी डूब
जाता है और जल्दी ही चढ़ता है। इसी कारण, शाम का जीवन भी शीघ्र ही मद्धष पड़
जाता है।
पूजा समाप्त करने के वाद विंग कमांडर रंगेकर ऑफिसर्स मेस में जाया करता था
जहां वह शाम को ड्रिंक अवश्य लिया करता था । यह उसकी दिंदगी का एक रुटीन बन
चुका था । वद एक पायलट था और फाइटर जहाज उड़ाया करता था । इस कारण, उसकी
जिंदगी में कई अंतर्विरोध थे । एक ओर तो वह ईश्वर से डरता था और समझता था कि
उसकी कृपा से ही जिंदगी का एक-एक दिन जिया जा रहा है, वरना उसके प्रोफेशन के
अनुसार इस वात का जरा भी भरोसा नहीं था कि किस वक्त, लड़ाई में अथवा ट्रेनिंग फ्लाइट
के दौरान उसका जहाज किसी हादसे का शिकार हो जाए । दूसरी ओर, इस तनाव भरे जीवन
की शिटदत को खत्म करने के लिए वह हमेशा हर शाम ड्रिंक लेता था, भले ही बस एक
पेग! और इसके पश्चात् वह 'दस फॉर ऐंड नो फर्टर' करता था क्योंकि अगले दिन उसकी
फलाइंग इूयूटी हुआ करती थी ।
विंग कमांडर रंगेकर के रुटीन में तेजपुर पहुंचकर भी कोई बदलाव नहीं आया था ।
आ भी कैसे सकता था? वह जिंदगी का मूल्य पहचानता था और हर पल की कद्र करता
धा-पौज मस्ती करके, भगवान से डरकर और हर एक से अच्छा व्यवहार करके । इसीलिए,
एक फाइटर पायलट की तरह वह पूरे एअरफोर्स स्टेशन में बहुत हरमन प्यारा था । यहां
तक कि उसको अपने अंतर्विरोधों से भी मोह हो गया था और उन्हें उसने अपने दिल की
धड़कन का हिस्सा बना रखा था ।
रंगेकर ने महसूस किया कि कोई उसके समीप आकर खड़ा हो गया है। उसने बंद
नेत्रों को खोला । उसकी एकाग्रता उखड़ने लगी थी । किसी की उपस्थिति ने उसकी तल्लीनता
को प्रभावित करना शुरू किया था । उसने देखा, उसकी बेटी नलिनी प्रभा उसके समीप
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