आदिम रात्रि की महक | Aadim Ratri Ki Mahak

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : आदिम रात्रि की महक  - Aadim Ratri Ki Mahak
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about फणीश्वरनाथ रेणु - Phaniswarnath Renu

Add Infomation AboutPhaniswarnath Renu

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
विघटन के केश ::. है४'रामफल की बीवी ने बीच में ही वठा को माँ को काट दिया, “'झरजुन मिसर भ्रीर गेंदा भा को वात कहती हो मौसी * तो पूछनी हूँ कि गौव में वे दोनो करते ही क्या थे ? “विल्लल्ला” होकर इसके दरवाजे से उसके दरवाजे पर खनी 'चुनियाते' ग्रौर दाँत निपोडकर भीख मांगते दित कांटे थे । अ्रव घहर में जाकर 'होटिल' में भात राँधते हैं दोनो । पिछले महीने श्ररजुन मिसर ग्राया था । भ्रव बदुझा में पनडब्वा और सुर्ती रखता है। तोद निकल गया है।”ग्तो तू भी रामफल को क्यो नहीं भेज देती ? तोद निकल जायगा ।”*किसी ने कहा, “'एहू ! सभी जाकर बाहर में 'रिश्कायाडी ' सी चते हैं । है भगवान ! ग्रघेर है।””जशब मिला, “क्यों ? रिक्शा सी चना बहुत बुरा काम है, क्या * पाँच रपये रोज की कमाई यहाँ किस काम में होगी, भला ?सभी ने देखा, कंवर्त टोली का सच्चिदा, जो पाँच पैसे का कपूर लेंने आया था, पूछ रहा है, “बताइये ?”” किसी ने कोई जवाब नहीं दिया ।सच्चिदा घला गया तो चुरमुनियाँ ने भोठ विदकाकर बहा, “इसके फड़फडा रहे हैं। “ई भी किसी दित उडेगा । फुर-र 1”१ बहुत देर से रुकी हंसी छलक पढ़ी । लोग बटुत देर तक उसकी वात पर हृसते रहे । चुरमुनियाँ वी दादी पुकारने लगी, परी थो चुरमुनियाँ 1”रात में चुरमुनियाँ बडघरिया-हदेली में ही सोती है, गंगापुरवाली दादी के साथ । दादी सुवह-शाम चाय पीती है भौर चुरमुनियाँ को घाय की भादत पढ़ गई है। भाज रविवार है। झान रात में दी बार चाय पियेगी, गगापुरवाली दादी ।सेकिन झाज चाय पीने का जी नहीं होता । चुरमुनियाँ चुरचाप झपनी कबरी में सिमट-सिकुडकर भ्रंगीठटी पर चढी केतली में पानी थी *गनगनाहट' सुन रही हैं । दादी ने दिल्ली के सुर में पूछा, “घाज तुम किसका 'विरह-बिजोग सता रहा है जो इस तरह “7 7,* १




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now