आश्रमभजनावली | Aashram Bhajnawali

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2.66 MB
कुल पष्ठ :
365
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)5८. भषकय ने टूर 5२ना२, सच ला 5ना सेकभान
स्वामी, जवां श्री चिंचघजूने हु नमस्जर 55 ४. ( तेबुं हुं
ध्यान घड़े ४ १. तेना साक्षर शान्त, सभ्य छे; तेज
सपनी शय्या जनवी छे, तेनी नालिभांधी 5मण 5त्पन
थयेश्रुं छ, णना हवाना ते स्पाभी ४, ाणा वि्वने।
घर छे, नहर रवे ते नििन्त नमने नधना >वे।
म्रने। चाशु छे, मे. इध्याशु5री शरीत्णेत छे, सब
सपत्तिने! ते स्वानी छे, अभद्र गन तन नेज छे सगे
ये।गीजा न “यान तेने 5णी २5 छे.& छथपडे 2 पड़े, नाशीयी, है शरीरधी शनधी
3 न्माणुथी हु न? 2४ न्मुपराध वे,ते 5भपी 3त्पतत
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5द्याजुडरी नहिप, ते णधानी ने क्षभा 5२. चोरी
नत्य ण्त्य5पूरे थ!न्में!,१० हु नथी रणस्युनी इ्छि। अस्त, 3 नथी स्व नी,
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तवाखेधा आशीनाननी पीड़ा! ६३ थाय सटेडु ० हूं
धन थ.
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