आश्रमभजनावली | Aashram Bhajnawali

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Book Image : आश्रमभजनावली - Aashram Bhajnawali
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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5८. भषकय ने टूर 5२ना२, सच ला 5ना सेकभान स्वामी, जवां श्री चिंचघजूने हु नमस्जर 55 ४. ( तेबुं हुं ध्यान घड़े ४ १. तेना साक्षर शान्त, सभ्य छे; तेज सपनी शय्या जनवी छे, तेनी नालिभांधी 5मण 5त्पन थयेश्रुं छ, णना हवाना ते स्पाभी ४, ाणा वि्वने। घर छे, नहर रवे ते नििन्त नमने नधना >वे। म्रने। चाशु छे, मे. इध्याशु5री शरीत्णेत छे, सब सपत्तिने! ते स्वानी छे, अभद्र गन तन नेज छे सगे ये।गीजा न “यान तेने 5णी २5 छे.& छथपडे 2 पड़े, नाशीयी, है शरीरधी शनधी 3 न्माणुथी हु न? 2४ न्मुपराध वे,ते 5भपी 3त्पतत थयेलें। े्य $ इश्त मानसि£ छेय, नभुझ ब्छु तेथी देय 2 सभुड ने 5्यु ते अर छे!य, है इवासागर, 5द्याजुडरी नहिप, ते णधानी ने क्षभा 5२. चोरी नत्य ण्त्य5पूरे थ!न्में!,१० हु नथी रणस्युनी इ्छि। अस्त, 3 नथी स्व नी, धस्छ। 5रते।, रे ! भाक्षचाधि नने घस्छा नयी; डुजथी तवाखेधा आशीनाननी पीड़ा! ६३ थाय सटेडु ० हूं धन थ.




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