अंतिम साक्ष्य | Antim Sakhshy

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
148
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)|शान समा'त कर मीना घर जाने के लिए जिद करने लगो, तो
सैलाग ने प्रताप को लाइ-भरे स्वर“ में डांट पिलाई, “जीजा
जी ! आप मद लोग बोच में बेटे रईगे, हो हम गाना-दाना बंद
कर देंगे
प्रताप अपने अतिरित उत्साह पर थोडा झेंपकर वाटर वा
गए, । कलाश ने उनकी मोहासवत दृष्टि को हिकारत की नजर
से देखा था ।
दाद में फैलाश की परमाइश पर भीला ने कई गीत सुताएं,
बाधी राव्र तक । रात के अधेरे को चीरते द्द-भरे सुरोले स्वर
दिलों में हुक उठाते रहे । प्रताप सो न सके, उप्त हुक को अपने
सीने के भीतर मट्सूसते रहे !
है नहीं हूं नगमए जाफिजां, मुझे सुन दे: कोई करेगा अदा,
मैं बडे बरोग की हू सदा, किसी दिल जले को पुकार हूं ।
बीजी के आदेश पर विकौ-सुरेश सीना को 'मोना मौसी
कहने लगे। एक-दो बार का औपचारिक मिलन अच्छो-खासी
मित्रता में कब और कंसे ददल बया, न मीना जान सकी औरत
बीजी ही । भीजी वो मीना था गरिसापूर्ण गांभीर्य पसन्द
आया । प्रताप ने उसकी खामोश बांखो में सागर को हरहराहट
महंभूस की । उस पर सीता को तिलिस्म-भरी आवाज से वे
जिधकर रह गए । प्रताप ने पहली सुलावात मे ही इस उदास
आंखों बाली लधगीनुमा औरत से मुंदी के अदृश्य अनुबंध पर
इस्ताकर कर दिए । हमेशा अपनों सूझ-बूस और दूरदशिता से
बम लेने वाले प्रताप, उस समय न सोच सके कि अपनी छोटी-
सो गृहस्यी, उन्हें इस प्रकार के लुके-छिपे सम्बन्ध की इजाजत7 नहीं देगी। अपने कतंय्यो के प्रति सबग, कामं.से-द एस रखनेबाली उनकी पत्नी सुरजर री रिश्ठे-नातों के प्रति दुछ ज्यादा
ही अनुदार थी, पर्तु उस पर भी मीना गा जादू चल गया
श्दे
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