श्री पच्चीस थोकड़ा | Shri Pachchis Thokada

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Shri Pachchis Thokada by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्योस वोलको थोकड़ो । -र्9 ९ इग्यारसें वोले झुणस्यान चवदे-ह मिध्यात्व, २ सास्वादन, ३ मिश्र, ४ झविरतिसस्यक्टी ४ देशविरति, ६ प्रमेतविरति, - ( प्रभादी ), ७ झपस्तविरति ( अघमादी ); ८ झपूच- कर ( झनिवृत्तिवादर ); ४ /झनिवृत्तिबादर ( निवृत्तिकण ); १० सूदमसस्पराय,: ११ उपशांतमाहिनोय, १९ चीण ,मोहनीय; :९३ संयागोकेच ली, १४ अयोगी केवली,। शुणस्थान किसको कहते हैं ? सोह और योगके निमि- सतसे सम्पग्द्शन, सम्यग्तान आर :नसस्यक- चारिन्न रुप झात्साके गुणोंको.. तारतस्यरूप उपवबस्था विशेषका युणस्यान कहते हें । ९२ वारसे वोले पांच इंद्रियोंका तेवोस विषय-- २४० विकार । इन्दियके विपय-- १ श्रातन्द्रियका तीन विपय--१ जोव शब्द, २ छाजाव शब्द, ३ मिथ शब्द ।




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