श्री नवपदार्थदर्पण | Shri Navpadarthdarpan

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Shri Navapadarthadarpan by ब्रह्मचारी शीतल प्रसाद - Brahmachari Shital Prasad

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(१) दरदासके नामसे दूकान खोल दी । आपकी कलकत्तेबाली दूकान व लखनऊवाली दूकानने खूब तरकी की । लखनऊकी दूकानसे' चिकनका माल कलकत्तेकी टूकानके अठावा ओर भी बहुत दूर २ बड़े २- झाहरों ( बंबई, अहमदावाद, दिल्ली आदि स्थानों )में जाने लगा । आपके भतीजे लाला दामोद्रदासनी बहुत बुद्धिमान व परोपकारी थे । लखनऊ जेन सभाके मंत्रित्वका कार्य २३ वषतक लाला दामोदरदासजीने बहुत उत्तम रीतिसे किया था । लखनऊमें नो कुछ धर्मकी रोनक है वह लाला दामोदरदासजीके ही गाढ़ प्रयत्नका फल है । छाठा दामोदरदासनी कचहरीके कार्यामिं भी बड़े चतुर' थे, वकीलोंको भी आपकी सम्मतिसे लाभ पहुंचता था । श्वेतांबर जन समाजके साथ जो श्री सम्मेदशिखर नी पूजाका मुकदमा चठा था उसमें लाला दामोदरदासजीकी प्रामाणिक गवाहीका हाईकोटके जजोंपर भी असर पड़ा था । आप घमेके कामोंमें हरतरहसे मुस्तेद रहते थ्रे। ला० दामोदरदासनीने ही ला० निनेइवरदासनीको व्यापरका काय॑ सिखाकर बहुत होशियार कर दिया था | ला ०विदे- झवरनाथजीने ३ मरतबा श्री सम्मेदशिखरजीकी यात्रा की थी, और भी बहुतसे तीर्थाकी आप यात्रा कर चुके थे । आपने अपनी ३० वषकी उमरसे ही रात्रिमें पान पानी वंगेरह कुल चीजोंका त्याग कर दिया था | आप हर अष्टमी, चतुद्शीको एकाशना करते थे । आपने अपनी कोठी छापाबाजारमें एक मनोज्ञ चत्यालय श्री चन्द्र- प्रभ भगवानका बनवाया था उसमें रोजाना आप पुजन करते थे । आपको डाक्टरी दवाईका भी जन्मपयन्त त्याग था । बानारकी कुल मिठाई व पूरी वगेरहका भी आपको त्याग था। इसके अछावा




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