पावस प्रवचन [भाग 4] | Pavas Pravachan [Bhag 4]

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Book Image : पावस प्रवचन [भाग 4] - Pavas Pravachan [Bhag 4]

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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पावस-प्रबुचन लक '. ,€ यह शास्त्र-वावय है श्रौर सत्य है किन्तु इस वावय को भी सभी अपेंक्षाओं से समभना पड़ेगा । ी नयवाद, सापेक्षवाद, स्याद्वाद या श्रनेकान्तचाद की जो जेत़ दर्शन की मौलिक विचारंघारा है उसके मूल में निर्णायक शक्ति की ही महत्ता छिपी हुई है । ज्यों-ज्यों ज्ञानाजन किया जायगा, त्यों-त्यों सत्य के विविध रूप भी सामने आएंगे और असत्य के हजारों रूप भो होंगे । इन सब के बीच - निर्णायक शक्ति न सिर्फ सत्य के बन्यान्य रूपों की परख करेगी बल्कि उन रूपों में सामंजस्य बना कर भेद-विज्ञान को समग्र रूप से हृदयंगम भी करायेगी । मिथ्या से दूर रहना और सत्य को घारण करना--ज्ञानाजन की अवस्था. -में यह -सम्सकू निर्शायिक-शक्ति से ही बन पड़ेगा । हू भेद विज्ञान, साधना श्रौर निणय... अं आ्रात्मा एक है-- इसको जब सभी अपेक्षाओं से. समभने का यत्न होगा तो भेद-विज्ञान की गहराइयां . समक्ष आएंगी । आत्मा की नि्सयिक-शक्ति एक अपेक्षा से यह कहेगी कि श्रपनी श्रात्सा और सिद्ध. की आत्मा सुल स्वरूप से एक है किन्तु भ्रभी जो पर्याय-भेद है, उसे अपनी साघना के बल से दूर करना होगा । ज्ञानाज॑न की अवस्था में सम्यक्‌ . निणंयः से: भेद-विज्ञान स्पष्ट गा तो साघना की अवस्था में सम्यक्‌ निणंय से पुरुपाथ एवं त्याग की भावना को बल मिलेगा ) न श्रात्मा में निर्यायक शक्ति की अभिव्यक्ति होने पर यह समभ्ा जा सकेगा कि आत्माएं जितनी हैं, आत्मिक भाव की. दृष्टि से एक हैं लेकिन उन सवका स्वतंत्र अस्तिव अलग-अलग है । सब श्रपने-अपने स्वरूप के रूप में रही हुई हैं । सभी के भिन्न-भिन्न क्रम हैं-- भिन्न-मिन्न पुरुपार्थ हैं तथा विकास के भिन्न-भिन्न तरीकें हैं । इन हृष्टियों के साथ चतंमान मानव जीवन की पर्याय में रहने वाले आप चंतन्य स्वरूप जब भिद-चिज्ञान को गंभीरतापुर्वेक समभने का यत्न करेगे और यह यत्त भी योग्यता की हष्टि से अपने आपको सिद्ध-स्वरूप समभ कर करेंगे, तब आपको अनुभव होगा कि सिद्ध स्वरूप की वास्तविकता तक पहुंचने के लिये अपने मस, वचन और कम को किस रूप में ढालने में किस प्रकार के निर्पुंप करने होंगे ? निर्णय के वाद सतन्मयता ज्ञान और साधना के मार्ग पर स्वस्थ निर्णय ले लेने के उपरान्त तन्मथता की आवश्यकता होगी । सामान्य स्थिति में भद-विज्ञान नहीं झ्राता-- वि अर




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