श्रीरामकृष्णवचनामृत | Shree Ramkrishnabachnamrit

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : श्रीरामकृष्णवचनामृत  - Shree Ramkrishnabachnamrit
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about महेन्द्रनाथ गुप्त - Mahendranath Gupta

Add Infomation AboutMahendranath Gupta

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
(१५)ब्राद्मसमाज के अनेक लोग उनके पास आया जाया करते थे । श्रीरासद्ण केशवनन्द्र सेन के ब्राह्ममन्दिर में भी गये थे ।श्री रानफुप्ण ने अन्य धर्मों की भी साधनाएंँ कीं । उन्होंने कुछ दिनों तक इस्लाम धर्ग था पालन किया और “अल्लाह!मन्त्र का जप करते ५. रत उन्होंने उस धर्म का अन्तिम ध्येय प्राप्त कर लिया । इसी प्रकार उसके उपरान्त उन्होंने ईसाई धमं की साधना की भर ईसामसीह के दर्शन किये । जिन दिनों वे जिस धर्म की साधना में लगे रहते थे, उन दिनों उसी धर्म के अनुसार रहने, खाते, पीते, बेठते-उठते तथा बातचीत करते थे । इन सब साधनाओं से उन्होंने यह दिखा दिया कि सब धर्म अन्त में एक ही ध्येय में पहुंचते हैं। और उनमें आपस में विरोध-भाव' रखना मूखता हैं । ऐसा महान्‌ कार्य करनेवाले ईश्वरी' अवतार श्री राम- कृष्ण ही थे ।इस प्रकार ईण्वरप्राप्ति के लिए कामिनी-कांचन का सवंधा त्याग तथा भिन्न भिन्न धर्मों में एकता की दृष्टिट रखना इन्होंने अपने सभी भक्तों को सिखाया और उनसे उनका अभ्यास कराया । इनके कतिपय शिव्य आगे चलकर भारतवर्ष के अतिरिक्त अमेरिका आदि अन्य देशों में भी गये और वहाँ उन्होंने धीरामकृप्ण के उपदेशों का प्रचार किया ।१५ अगस्त सन्‌ १८८६, की रात को गले के रोग से पीड़ित हो श्रीरासकृप्ण ते महासमाधि ले ली; परन्तु महासमाधि में गया केवल' उनका पांचभोतिक शरीर । उनके उपदेश आज संसार भर में श्रीरामकृष्ण मिशन के द्वारा कोने कोनें में गूँज रहे हैं और उनसे असंख्य जनों का कल्याण हो रहा है .है... ---विद्याभास्कर' शुवल




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now