बिरजा | Birja

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Birja  by राधाचरण गोस्वामी - Radhacharan Goswami

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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नपपसरनटपसपटथ- नननरनरससवरससससथयमसस्सटसमससथममसनयपयरसमधनन(६ )और उसको दो पुच्र सन्तान भी डुये थे । गोविन्द की सातानाम मात्र को र्टक्िणी ( घर की खामिनी ) थी, घर का कांस कान सब बड़ी वह्न केछ्ठो हाथ सें घा । गंगाघर की पत्नी और विरजा की एकद्ी अवस्था थी । अर्थात्‌ गंगाघर की पत्नी की वयस दस वर्ष सार थी नास नवीनमणि घा |इस वयस में वालिका स्तरामी के घर नहीं नाती हैं किन्तुशनवीन के साता पिता दोनों की संक्रासिक ज्वर में खत्यु छोने से उसको यहां ले आये थे 1जिरजा इस घर में आय कर रहने लगी, वह अपने स्वभाव गुण से सब की प्रियपाच बन गई. विशेषत: छोटी वह्ठ नवीन के संग उसकी अत्यन्त प्रीति बढ़ गई, वह दोनों एक संग स्रान करती थों, एक संग खेला करती थीं ।'. एक दिन खष्टिपी आद्ारान्त में खाट विछाकर आँ- रन सें सो रक्ी है, विरजा से माथा देखने को कहा वह सिरहैंगसे वैठी माधा देख रही है इस समय गर्क्षिणी ने विरना से नौका दूवने का हत्तान्त वर्णन करने का अत्ु- सोध किया 1विरना बालक थी, नवीन के संग खेल में सत्त रहा करती थी. सुतराम्‌ वह सब विषय एक प्रकार थूल गई थी अब वक्त सव वातें उसे स्मरण हो आईं, उसकी आंखों से नल गिरने लगा 1 स्टन्तिी ने वाहा “भ्रव दया भय हे ?




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