जीवट की कहानियाँ | Jivat Ki Kahaniyan

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Jivat Ki Kahaniyan by श्यामनारायण कपूर - Shyamnarayan Kapoor

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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द् जचिटकी कहानियाँझगले दिन श्रात:काल श्नीडर श्र एशन नर तीन पोर्टरोंको साथ लेकर नीचे लौट गये । दलके अध्यक्ष, मरकल, वीलैण्ड और बेलजनवेच कुछ पोर्टरोंके साथ श्ाठवें पड़ावमें रुक गये और ऋतु अनुकूल होनेका इन्तज़ार करने लगे । मौसम सैंभलनेपर ये लोग आगे बढ़ना चाहते थे । रास्तेमें श्नीडर और एशन नत्रेनर सातवें पड़ाव तक पहुँचनेके पहले ही अपने साथके पोर्टरोंको पीछ़े छोड़कर आगे निकल गये । पोर्टर बेचारे कठिन परिश्रमके कारण बहुत थके हुए थे और बहुत धीरे धीरे नीचे उतर पाते थे । पीछे रह जानेपर उन्हें रास्ता ढूँढ़नेमें बहुत दिक्कत पड़ी । दो दिनमें ये लोग बमुश्किल छुठे पढ़ावमें पहुँचे । वहाँपर सारे तम्बू , खाद्य-सामग्री और दूसरी ज़रूरी चीजें फैकाबातके वेगसे उड़कर न जाने कहाँ ' पईुँच गई यीं !मौसमकी हालत बराबर खराब होती जा रही थी । जो लोग पाँचवें पड़ावमें ऋतु अनुकूल होनेपर श्वागे बढ़नेकी आाशासे रुक गये थे उन्हें भी लाचार होकर नीचे लौटना पड़ा । ९ जुलाईको मरकल और वेलजनबेच चार पोर्टरोंकी साथ लेकर सातवें पड़ावमें झा गये । वीलैएड श्र तीन पोर्टर पीछ़े रह गये । तीनों पोर्टर तो किसी तरह सातवें पड़ावतक पहुँचे पर वीलिण्डकी रास्तेमें सृत्यु हो गई । सातवें पड़ावमें पहुँचकर भी कुछ आराम न मिल सका । तम्बू वगैरह उड़कर गायब हो चुके थे । कुछ लोग थकाबटकी हालतमें विवश होकर छुठे पढ़ावकी तरफ बढ़े । परन्तु दुर्भाग्यने यहाँ भी साथ न छोड़ा । छुठे पढ़ावके तम्बू और खाद्य-सामग्री पहले ही उड़ चुकी थी । छठे पढ़ाव तक पहुँचते पईुँचते पोर्टर इतने




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