साहित्य शास्त्र परिचय | Sahitya Shastra Parichya

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Sahitya Shastra Parichya by डॉ. सुधाकर शंकर कलवडे - Dr. Sudhakar Shankar Kalvade

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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साहित्य बौर वाइमय । १५ का विषय जीवन और जगत है, लौर घम मे उसमें सौदय आता है। घम हमारा हृदय उटार पवित्र, विशाल, सहानुभूति पूण, स्नेहयुक्त बना देता हैं । बिचारा और भावा वा घम उटात बनान मे हाथ बेंटाता है । और भाव की उदारता पर ही साहिय का सॉंत्य निमर रहता है । साहित्य श्रेष्ठ वनान में घम सहा- यता पहुंचाता है । घम का एक पक्ष विश्वास है । प्रति साहचय दे प्रभाव के फरस्परूप मानव कं हुतय में प्रति के सम्यव मे कुछ विश्वास उत्पत्र हो जाते हैं। अपनी कोमल और भावमयी बल्पना के सहारे मानव प्रति के विविध रूपा के अपराल मे किसी लिप मूर्ति के दधत वरन रूगना है। साहित्य भे इड्टी विश्वास वी प्रतिप्ठा रहती है जौर इ ही कल्पनामूलक मतियां की भावा त्मक अभियक्ति पाई जाता है।' परतत्र अवस्या मे दंग का सबतोमुखी पतन होता है । धम जौर साहित्य का पराधीनावस्या में पतन होता है । वितान के आविष्कारा न घम एवं साहित्य दोनो पर प्रारम्भिव अवस्या मे कुठाराघात जिए हैं। डार्रावित के मिद्धाता न ईश्वरीय जस्तित्व लिद्धात को ही जड से हिला दिया । वितान क॑ साथ साहित्य रौर घम को कम उठाने पढे । बेचा निक्युष में साहित्य एव घम के रूपा मे पर्याप्त परिवर्तन आया । आधुनिव काल से धम की अपना विनान वी अधिव सहायता साहित्य लेता है । साहित्य और इतिहास प्राचान कार में इतिहास को “यापक परिप्रे्य मं देखा गया था । इतिहास प्रत्यल भान थे संम्बय रखना है । इतिहास में अतीत की खोज होती है। दति हामकार विपयवस्तू जौर व्यवस्थापन मे “यास्या द्वारा काम सता है, ऐति हासिक घटनाओ को कारणवद्ध श्खलाजा में रखता हुआ “यास्या के ढंग पर चरित्र के भावों को भी यक्त बरता है । इतिहासवार को शिलालेख, बभिलेख मूद्रा सिवके आदि पर निभर रहना पढ़ता है। घटनाएँ तिथियाँ व्यक्ति विष इतिहास वे अभिन्न अग हैं । इतिहास का अप है भूतवाठ वी घटनाजो लौर उन घटनानां स सम्बंधित स्त्रा पुरपा के चरिन्ना का निपिवद्ध स्वरूप है । इतिहास मे सम्ाटों रोनापतिया राजनीतितों राजपुस्पों घामिक मठाधघीणों के अच्छे या बूरे फ्रियवलापा का ता जोसा तथा युद्धो राजपीतिक पडयनों घामिक विद्वाहो इत्याति का वणन आता था | आज कल मास्कृतिक इतिहास में रीतिरिवाज, परम्परा लोबविश्वाम बादि का भी वणन होता है ! * साहित्य म भावना रचना मर बनुभयों की अनियक्ति होती है । साहित्य जनुभवा वो इस स्तर पर प्रयोग करता हैं निसस व आगामी काल तफ भी “याख्या कर सकें । सतीत वी यास्या के लिए साहित्य को इतिहास पर ही निभर रहना पढ़ता है । प्राचीन काल में इतिहास को साहित्य का अग माना जाता था 1”




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