पद्मराग | Padmarag

[adinserter block="2"]
Add Infomation About. Dr. Nandkishore Tiwari
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
200
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about डॉ. नन्दकिशोर तिवारी - Dr. Nandkishore Tiwari
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)पद्मरागमहारानी ने कौतूहल और आ्ाश्चय से भरी अ्राँखों से टामरिन की
ओर देखा | बोरलीं--क्या यह सच है टामरिन १“मेरी अच्छी सम्राज्ञी, श्रापकी बुद्धि मुझसे कहीं अधिक प्रशस्त
तर प्रखर है । कया श्राप समभती हैं, यह सच है ?'”'“यदि लोग उसके सम्बन्ध में ऐसी कहानियाँ कहते हैं तो वह अन्य
राजाश्ों से भिन्न पुरुष होगा ?””--महारानी ने धीरे से कहा ।!“निश्चय ही ।”“क्या वह सुन्दर है !””“पवे गोरवण हैं; उनकी आँखें बादाम के आकार की भाँति हैं
और उनके हसते ही उषा खिल उठती है ।”'““उसे मेरे पास मेज दो टामरिन ।””--महारानी ने दृढ़ता-पूवक कहा।“पवे नहीं आएंगे, महारानी ।””“फिर सेना भेज, उसे बन्दी के रूप में यहाँ उपस्थित करो; परन्तु
तुम हसते क्यों हो !””टामरिन कौतूहल से इतना हंस रहा था कि उसका समस्त शरीर
हिलने लगा । उसकी हँसी के प्रभाव में कर महारानी स्वयं हसने
लगीं । उसके बाद वे चुप हो गई' श्रौर टामरिन के उत्तर की प्रतीक्षा
करने लगीं ।टामरिन अभी हँस ही रहा था । यद्यपि एक सम्राजी के सम्मुख
शपने भृत्य का इस प्रकार हँसना श्रभद्र था; परन्तु टामरिन उनके
विशेष कृपापात्र अनुचरों में था ।द्
User Reviews
No Reviews | Add Yours...