नमस्कार स्वाध्याय | Namaskar Savadhyay

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Namaskar Savadhyay  by पुरातत्त्वाचर्या जिनविजय मुनि - Puratatvacharya Jinvijay Muni

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श्र नमस्कार स्वाध्याय(१) मधुरायागपटमध्यस्थापितमड्लमुखपाठःभा चित्र पण उपर्युक्त विन्सेन्ट ए, स्मिथना श्रेयमांनी प्लेट 01 परथी तैयार करवामां भाव्यु छे । भा आयागपर छे, जेमां वच्चेनी जग्याए श्री भरिहूंत मगवन्त पद्मासने स्थित छे । तेभो ध्यानमुद्रामा लीन छे अने शिरपर छत्र शोमी रह छे । तेमनी आजुबाजु '्वार तिलकरत्न हता ते न लेतां तेनी जगाए अहीं ' चत्तारि मंगल” आदिनों मूठ पाठ मूकेल छे |भा आयागपटनी उपरनी बाजुर चार अने नीचेनी बाजुए,; चार--एम मदी कुल आठ मंगल आपेलां छे । खूब ज प्रचलित एवां भा ' भष्टमंगल” जैन रीतिनां अति प्राचीन प्रतीको छे । आनाथी प्राचीन अने भावी सारी रीते एक साथे जठ़वायेल * अष्टमगल* हजु सुधी बीजे क्याय मछ्या नथी । डॉ. उमाकान्त पी. शाहे पोताना ' 5६पत65 19 जक्फ& 271 नामक कलाग्रन्थमां भा मगलोनु नीचे प्रमाणे नामकरण क्यु छे :--उपरनी हरोठ (जमणी बाजुएथी)---(१) 3. छः ० एप5५४ (मत्स्ययुगल-मत्स्ययुग्प) (२) &. 9९४प्छॉध ए५ा (पवनपावडी)(रे) 3. उप्र 52 हद घ: (श्रीवत्स)(४) 2. ?०फ़ए९ 80% (शरावसंपुर)नीचेनी हरोठ (जमणी बाजुएथी)---(५) &. पा 2:घ१०६७४ (तिलकरत्न)(६) & एप छाठफ़ाण 1,0605 (पुष्पचगेरिका-पुष्पगुच्छ)(७) 30 पातेश्वफ्व5 एा ए21ं8प्रथ06 (दद्रयष्टि व वैजयती)(८) &. वन्णानारि थी नई8 (ठए5091010प5 ए556) (मेंगल-कलद)मूलपाठनी बे बाजु आपेल स्तभो * छलडाधण 309 शातन्ण ”. रीतिना छे मनें प्रत्येक स्तेमनी उपर तथा नीचे मिन्न मिन्न प्रतीको आपेल छे । जमणी बाजुना स्तंभनी सौथी उपर ' ध्मेचक' छे अने डाबी बाजुना स्तंमनी उपर ' कुंजर ” (हाथी) कडारेल छे | बन्न स्तंभोनी नीचे पण जुदा जुदा बे प्रतीको छे । आ व्वारे प्रतीकोनी मिन्नता शिव्पनी दष्टिर विचारणीय लागे छे !जे परथी भा चित्र तैयार कर्यु छे ते प्लेट न. एप ने मथाठ् नीचे प्रमाणे लखेल छेः--** & ५8 छुथ088 07 ए2160 ० पगए9४९ 0 04 पण्च्डाशफ *, 3४1 पछ 9५ वा वध पद वि प्रो छठ 510 एव दिएह 0185. ' (द) पश्चपरमेष्टिनमस्कारग्रथितरम्यसखूपटी श्रीनमस्कारमत्रना पाच पदोना पड़िमात्रानो पाठ यूंथणीमा आते तेवी रीते ऋषि मनोहरे रगीन पाटी गूथी छे, एनु आ चित्र छे । ते संवत १७३९ ना भादरवा वदि पांचममा दिवसे गूथी छे एव तेमा टर्शाब्यु छे। भा पारी बार फूट लाबी अने पोणों इच पहोछी छे भने तेमां अक्षरों सिवाय आगठ पाछछ सुशोभनो छे । ते सुशोभनों शाना सेकेत छे ए; समजातुं नथी ।ग्रथमांथी सचित थता तथा अन्य ओगणीस येत्र-चित्रोनो पारिचियः---(७) उैकारःवाचककलापरमेष्टिपश्वकस्वरूपः (ए. ४ 5) सेठ श्री अमृतलाल कालिदास दोशीना जामनगरना संग्रहमांनी एक पारलीना चित्र उपरथी योग्य फेरफार शाथे भा चित्र चितरावी अहीं रजू करवामां आवेछ छे ।




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