जलती मशाल | Jalti Mashal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कर दुनिया 'भर के दवाजि टटोलंता फिरा, सुरक्षा परिपद में भारत को गाली- गलौज की, पर हम शांत रहे । जब पाकिस्तान सभी ओर से निराश हो गया तब उसने ताझकंद वार्ता का दामन पकड़ना चाहा कि शायद रूस ही काइ्मीर का मामला सुलभकवा दे । इस झ्राद्या को लेकर पाकिस्तान ने युद्ध-विराम के तीन महीने वाद ताथकंद वार्ता का प्रस्ताव मंजूर कर लिया । रूस का रुख जानने श्रौर उस पर चढ़ा भारत का रंग उतारने के -लिए पाक विदेश मंत्री श्री जुल्फिकार झ्रली भूट्टो रूस गए । लेकिन उनका पका हुआ ' पाकी पुलाव रूस के हवाई शझ्रड्डे पर ही फिसल गया। उसके बाद हमने भी श्रवने थिदेश मंत्री सरदार स्वर्णसिह को रूस भेजा 1 ताशकंद चार्ता का दौर ३ जनवरी १६६६ को प्रधान मंत्री श्री झास्त्री, विदेदा मंत्री, रक्षा- मंत्री व अन्य भारतीय अधिकारी वार्ता के लिए तादकंद गए । पाकि- स्तान की श्रोर से पाक राष्ट्रपति श्रयुब खाँ, श्री भुट्टो, वाणिज्य मंत्री गौर अ्रन्य ग्रघिकारी सामुल हुए । हमारी श्रोर से पहले से साफ घे.पणा कर दी गई कि काइमीर के सवाल पर कोई वात्तचीत नहीं होगी । वार्ता शुरू हुई । पाकिस्तान की श्रोर से जिद की गई कि कश्मीर का सवाल सबसे पहले लिया जाए, पर हमने इसका विरोध किया । वार्ता कभी सफलता की श्रोर बढ़ती, कभी वह असफल होती दिखाई देती । यह वार्ता बंद कमरे में दास्त्री जी व श्रयूव खां के वीच होती रही । कभी-कभी श्री कोसीजिन भी वातावरण को मधुर बनाने ग्रौर वार्ती को कड़ीवद्ध करने के लिए सहयोग देते नह । १० जनवरी की ज्ञाम तक कोई हल नहीं निकला । दोनों पक्ष झ्पनी-ग्रपनी वातों पर झ्ड़े थे, लेकिन शी कोसी जिन के बीच में पड़ने - से वार्ता समभीते के रूप में चदल गई श्र दोनों देशों के नेदाय्रों ने शांति समभीने के दस्तायेज पर हूँसी-खुशी दस्तखत कर दिए । दस्तसत करने के वाद रक्षा मंत्री से श्री शास्त्री जी ने कहा--“जिस तरह भ््पु




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