दयानन्ददिग्विजय महाकाव्य | Dayanandadigvijay Mahakavya

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Dayanandadigvijay Mahakavya  by श्री मेधाव्रताचार्य - Shri Medhavratacharya

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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थ १. दे भर : 6 “छह हि फेज ८3 १ । आम ह; हु । | सम ं (2) कर न न्‌ 2 (/ ड $) दयानन्द्दिख्िजयमहाकाद्य के दिपय में महान विदानों की- ६ हे त्रेदिक वाछूपय के परम विद्वान श्रीमान विश्ववन्धुजी शाख्री; एम« (0 के! थ. एप, ओ, एल. डायरेक्टर थी विश्वेश्वरानन्द वेदिक रिसच इंस्टीट्यूट [ “ नाभा हाउस, ठांगले रोड, छाहोर-- (ए ही). श्रीमेघात्रतपण्डितमहाभागाः ! ( $... यच्छीमद्विः स्वोपन्नं दयानन्दकाव्यं तत्तच्छन्दोड्लडगर- (6 5 जुणागार मधुर सुन्दर विषयतों गहने गभीरमपि सदबोधतः ९ 0) सरल सुगम दादरमिरततिदीपें: सुविभक्ते: सर्गेस्पनिवद्ध (डे है! मां कचित कचिच्छावयिता मचतसि प्रमोदलहरी सम॒त्पादिता ३ है) तन्मन्ये महत उपकारस्य माजनीकृतोडस्मि । यथाडस्यां ($ ह/ कृती महोपकारकों विद्यातपोविभवेन जनतोद्धारको नायक- ९ 1) स्तंथेवात्र विषयानुरूप: सहदयचित्ताहमादकरः शाद्धविन्यासो 1 6 वस्तुनिर्वाहश्चेति भूयो भूभः सफलीसूतपरिश्रमाणामदतने८पि की सुरभारतीपर्शीलनेन तदुलीद काना श्रीमर्ता वर्धापनं करोमि। (६ ह आशासे$नया कृत्याडपराभिरचेवंविधामिः कतिभिः श्रीमतां (6 $) भारतीयसाहित्यसेविनां मष्ये चिस्तनी यशःसम्रद्धिःस्यादिति॥। है २५-२-३८ .... भावत्कः कश्चिद विश्ववन्धुसमाख्य: । *” ( 0. डधढसडडरपडगनमापहर्पढरघडमभबमघडण्यढमडम& | न




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