हिन्दी विपूवकोष भाग - 13 | Hindi Vipoovakosh Bhag - 13

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Hindi Vipoovakosh Bhag - 13  by नगेन्द्रनाथ बसु - Nagendranath Basu

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रथ « दम त | थे युद्मिं महार ए सेन्यक अध्यक्ष बन कर पाशुरामभाऊ गा आए बढ़ ।. अ'गंरेजों को सर त्तन तकके जो सब स्थान टोपूसे जोत लिये; खत्तका शानन भार घुम्खुपत्थ गोखलक अपर सौंप दिधा और इम प्रकार झाप निश्चिन्त छो बठे |. १७८२ ईू०ी इस युद्धका, अवसान - हुआ ।. इतिदासमें यक्ो छतोय महिसुर युद्धक नामसे प्रसिद्ध है 'सहिसुरन्युद्धक शंष हो जाने पर सोरप्रपस्तनसें जो सन्धि स्थापित हुई, उमसें तुदरभद्रानटों तक सघन, परेशगढ़ और कोन्न,र देशाइयों के अधिज्ञत स्थान जो - एक समय टोपू सुनतानक अधिकारमें थे वे सबके सब मच्ाराष्ट्र सोमान्सभुक्ता हो कर. परशुवासक शासनाधों न ुए।. उन्होंने कोल र नगरमें एक मासनतदार मो नियुत्ता करके यह नवलब्ध स्थान घारवारके अधोन रख छोड़ा ।. -योगड्पतसनते लोट कर परशरामने देखा कि / घुन्वुपन्थ गोखेंले की तरके देशाई सरदारोंसे अथ सं यह करके अपनों चमता बढ़ा रहे हैं । अतः उन्हे गोख से को समताका क्लास करनेको चिन्ता पड़ी । १७८३ ई ०में उन्होंने कोल हापुरराजक विसुड अस्व्धारण करके उनका अभिमान चर किया था । १७८४ ईनमें सधव- :. रावको सत्यु होने पर बाजौरादवक राज्यारोहणक उप- लंक्षमें परण राम पूना लाये गये श्रौर यहां उनके लांध नाना फड़नवोगका विवाद को गया। इसके बाद _.. सुगलसं न्य # उपयु परि भाक्रमणसे तंग भा कर महा- ही राइ्सचिव नाना फ़ड़नवीशने सेनानायकोंसे सलाह ले ..... परण रामभाजकों सब थे सेनापतिक्र पद पर वरण किया । . उन्होंने मुगलकावनों पर “आक्रमण करमैक लिये पिरडांरो श्ौर अ्न्यान्य श्रखारोडी सेनाशोंको हुकुम दिया ।. १७८६ इनको साच सांसमें सुगलभेना' _. पतिक साथ परंशुरगामका चघमसात युद्ध छुमा । लि उसी साल: मह्ाराष्ट्रगसि हास तक लिये द्तकपुत्र कर श्रगग्जि कम चारो. सेल (017, 3 दाढ( ) द्‌ गीरावने मसनद पानेक . लिशे. सिन्धिया के सचिवकों अपना सुट्टोमिं कर लिया भ्रोर सिन्धियापतिकों महायतासे परशुरासने , न लनननपयपपपपपपरापापथरय सपा निया अलालथथटटटिएयं युद्धमें लाल खाँबें आक्रमणसे वे विशिषरूपसे आहत हुए । |... ओर नाना. फ़ड़नवोशमें घोर तक उपस्थित हुआ परशुराध माऊ-पहुचड्ुन लिख मेजा कि वे उन्हें सि'हासन लीनेमें यदि विशेष सदायता करे', तो रवय' चाजोराव उन्हें ४ लाख रुपये को सम्पत्तिदेगी |. यह उपय काममें लागिक पहले हो नाता फड़न- वीर शो मब बाते माल, मे हो गई ।. उन्होंने उपस्थित विपद्‌ सके उन्ो ममय परश,_रास भाऊकों बुला और उनका कान भर दिया । परश, राम तासगाँवसे शिवनेरी दुग जो १३ कोस दूर था, 8८ घ'टेमे पह चे और वहां बाजोगरावरो पशवा बनाऊ गा, यर प्रस्ताव सबके सामने प्रकट किया । पहले तो क्रिसोने उनको बात पर विखास न किया, पौछे मूढ़ बाजौरावने परश,राम को गोपुच्छ घौर गोदाबरो का पवित्र जल छुसा कर शपथ कराया भौर आप दुर्ग मे उतर कर भ्रपने भाई चिम नाजो श्रप्पाक साथ भावों राजधानीकों आर अग्रसर हुए। असरतराव परश रामक आदेशसे उस टुग में बन्दो रह । बाजोरावने पूना रा करे नाना. फड़नवो श- के साथ फिरसे दोश्तो कर लो। बाजोरावक इस अन्याय अाचरण पर क्र हो कर वल्लभटडने सिन्धियो » पतिकों पूनाको ओर ससन्य अग्रसर होमेक लिय प्राथ ना को |. फड़नवोश कुक डर भी गये, ती भी परगण,रामभाजने सतक भावरि यु करनेकों उन्हें _ किन्तु युद्ध नहीं इत्ा।.. नाना फाइन- सलाह दो। वौशने कि'कत्त व्यविस्यूढ़ हो कर युद्ध करना नंहीं' _ चाहा । वे सिंन्धियाक डरसे पुरन्दर होते हुए सतारा- को ओर चल दिये । बाजौराव और परश,रास पूल . मैं रह । . सिन्धियाराज जब पूना' गये, तब बाओराब : श्रौर परश,रामने उनकी खूब खातिर को । . बलन्लभटंह्ने . बहुत सोच निचारके बाद बाजोरावकों पदच्युत कंरक कद कर लिया श्र पंरथ मकों सलाह पा कर मधु रावको विधवा. पत्नोने चिमनाओी अप्पाकी दततकुत- पर्में ग्रदण किया । - चिमनाजी पेशवाके पढ़ पर नियों- _ नित तो हुए पर परण राम मन्त्रिपद परे रह कर राज _कॉय को देख रेख करे गे, ऐसा स्थिर छुआ । _.. परणुराप्र मन्त्िपंद पर प्रतिष्ठित हो कर चिममाओं को पूनानगर ले गये ओर उनकी - भरना रहते हुए भो. उन्ह' १७८दकी २६वीं मदकों * परेशवोंक पढ़ खरे न का थ्ि श




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