राजा लियर | Raja Liyar

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Raja Liyar by शत्रुघ्नलाल - Shatrughanlal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१६ थ ः राजा लियर लियर मारे शोक के उसी शव के ऊपर गिर पड़ा और श्रचेत हो गया । राजमहल में कूहराम मच गया श्रौर थोड़ी ही देर में सारे दहर में खबर फंल गई । राजा लियर प्रजा की दृष्टि सें बहुत ही सम्माननीय था । उसकी रानी भी वैसी ही दयालु और सच्चरित्र थी । प्रजा उसे बहुत चाहती थी । उसकी मृत्युका समाचार सुनकर सभी को दुःख हुआ। भूंड-के-भंड लोग काले कपड़े पहने हुए, शोक-प्रदशंन के लिए राजमहल के सामने इकटे होने लगें । और शाम को जब रानी का शव दमशान की श्रोर ले जाया जाने लगा; तो लियर ने देखा-- श्रसंख्य व्यक्तियों की भीड़ साथ चल रही है। रानी के प्रति प्रजा का यह मोह श्रौर सम्मान देखकर उसका हुदय एक बार फिर रो उठा । धीरे-धीरे कुछ दिन श्रौर बीते, लेकिन लियर को शांति नहीं सिल सकी । रानी की मृत्यु से उसे श्रपना जीवन सुना- सुना प्रतीत होने लगा । उसके मन्त्रियों ने उसे दूसरा विवाह करने की सम्मति दी, पर लियर ने उसे स्वीकार नहीं किया । उसने आ्राजीवन विधुर रहने का ही सिर्चय किया और लड़कियों के पालन-पोषण के साथ-साथ राज्य-कामों में श्रपने को इस तरह उलभा लिया कि महारानी की आ्रोर ध्यान देने का अवसर ही न सिल पाता था । धीरे-धीरे लड़कियाँ सयानी हुई श्रौर लियर बुढ़ा हो चला । उसमें श्रल्बनी प्रात के ड्युक 'जेक्सन' के साथ गोनरिल का विवाह किया । जैक्सन एक स्वस्थ श्रौर सुन्दर युवक था । उसके स्वभाव श्रौर राजवंश को . देखकर ही लियर ने उसे भ्रपना दामाद बनाया था । लेकिन ड्यूक हो जाने के बाद, लोग उसका वास्तविक नाम “जेक्सन' नहीं पुकारते थे । वे उसे श्रादर के नाते 'अल्बनी का ड्यूक' ही कहते थे । श्रागे चलकर यह नाम भी छोटा हो गया और जैक्सन को केवल 'ग्रत्बैनी' कहा ज़ाने लगा ।




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