देश - दर्शन | Desh Darshan

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Desh Darshan  by रामनारायण मिश्र - Ramnarayan Mishra

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about रामनारायण मिश्र - Ramnarayan Mishra

Add Infomation AboutRamnarayan Mishra

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
से कारत्रां सापान लाद लाद कर भृूमध्यसागर के तट . पर आते थे । “एल मनाक”” उँटों के ठहरने व. स्थान नामक सड़क अब भी प्राचीन काछ की याद दिछाती है । _ आधुनिक करो नगर का सचित्र बवण न वहाँ का शेपडस होटल स्वयं करता है क्योंकि यहां मिसो, मूंरी तथा न्यूचियन सभी सभ्यताओं का प्रदशन है । यहां थदि चाय पीने के लिये बेठ जाइये तो केरो के बदलते हुये जीवन की सन्द्र रूपरेखा देखने को मिल जाती है | शेरिया कपिल करोनगर की सब से बड़ी दुकानों वाली सड़क है | वहाँ की दुकानों के नाम तथा साइन- बंड स्वयं घोषणा करते हैं कि कृपक श्रेणी को छोड़कर समस्त करो निवासी अपनी जीविका के लिये संसार के दूसरे लोगों पर निभर हैं। रोमन, यूनानी, अरबी थौर आर्मनियन सभी लोग एक दूसरे के पढ़ोसी हैं भांति भांति के सामान तथा खोांचे बेचने बालों की आदाज़ों से गलियाँ सूँनती रहती हैं । झंग्रज़ सनिकां तथा अफसरों को भीड़ का. दृश्य (. १४ )




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now