भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन एवं संवैधानिक विकास | Bhartiya Swatantrata Andolan Avam Sanvaidhanik Vikas

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Bhartiya Swatantrata Andolan Avam Sanvaidhanik Vikas by राणजीत सिंह दरडा

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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च् भारतीय स्दतठ बता भाग्दोतन एवं स्वघानिक दिगास (घ) उत्तर का पहाशी प्रदेग रत की उस्रों सीमा पर एक दिशाल पवत-समूदू स्पिठ है। उनमें नेक पदन-धणियाँ हैं । इन धरशियों में हिमलय भयबिक प्रसिद्ध है। सिु एव द््मपु्र नदियाँ इस पंदठ-समूह को ठीन भागों में विरक्त करती हैं. (१) इिमालय (2) हिमालय के उत्तर परिचम के पवत ठया (३) हिमालय के दर्क्षिया-पूद के पदत । दिमालप पवत श्रणी मोदटार पवर्तों को घणी है । यह समार पा सबसे नदीन बह्ढाद है । हिमालय की सबसे ऊची 'दोटी एवरेस्ट है जिसकी ठ चाई ८४४ मीटर है। कचनचगा ८३८ मीटर ध्दलगिरो ८१७२ मीटर भादि भ्रतेक उाचाठिडाद चाटियाँ इस पवउ थ्रणी में हैं । हिमालय की सगमम (४ चोटियाँ भा प्स की उचतम चोटी माउन्ट स्लेंक से भधिक ऊंची हें । हिमासय के मध्य कहीं-कहीं ऊचे मदात हैं जिटें दून मदान कहते हैं। इस पदत-मासा में कामोर एवं बु टू घाटी भयनस्त विस्तृत उत्पाटक एव सुन्दर हर्यों वाली है । हिमालय को यह दीवार २४१४ ढिलो मीटर सम्बो भौर २४ से ३२ शिलोमीटर चोडी है । (व) सतलज-गगा-इहापुत्र मदान दिमालप पदत-थणी के दिए में स्पित यह मदान उत्तरी मातठ के परष्विए भाग मे पूद से परिचम तक फला हुमा है. तथा २४१४ किलो मोटर लम्बा है। इसकी चोडाई २४१ से ३२१ किलो मोटर ठक है । इस मदान मे दो बड़ी नचियाँ गंगा एवं ब्रहमापत्र धपनों सहायक नदिरों के साथ बहती हैं । इसमें सिघु सदी वी दो सहायक नदियाँ सतलज एव व्यास भी बत्ती हैं । गगा नदी वी प्रमुख सतायक नदियाँ यमुना रामगगा शारटा करनाली गडक कोसी. चम्दल बेतवा बेन छान भादि हैं । द्रहपुतर नदी ऋम मे हिस्ता मेघना सुरमा धादि नदियाँ सम्पिलित हैं। इद्ापब सही लिक,रढ़ तक (लगमण है ०. जिला मीरर ऊपर) शतयानों द्वारा यातायात के लिए सुलभ है क्म्तु जहाज बेवल मोह्ाटी तक हो पहुंच पाते हैं । इस मदान की भादादी बढ़ो घनी है भोर इसमें बड़े-दढे नगर बसे हुए हैं । (स) दक्षियी पठार सतलबज-गगा ब्ह्मापत्र-मदान के दक्षिय में एक पठार है जिसकी ऊ चाई समुद्र की सठ८ से ४८ से (रर मीटर हक है। यह पठार ठिकोना है झौर उत्तर-पूद एवं परिचिम में पवत थे णयों स घिरा हुआ है । य पवत शिया या ता घुसने पहाड़ों के भ्वगाष हैं. (जले भरादली को पहाडियाँ) या स्वय पठार के हो कटोरतम माग हैं जो झरण से बच रहें हैं। इनक क्नारे कापी कटे फटे हैं। इस पठार का घराठल टीलदार या लहरदार है । डिस फटो घाटी से होकर सबदा नदी इठो है दद पठारी प्रदेश को दो त्रिडोडादार भायों में दॉट देठो है । उत्तरी भाव मालदा पठार कइलाता है । मालवा पठार के पर्दिम हया उत्तर-पश्चिम में घदाददी को पहाड़ियाँ हैं दो उयमय पूद-परिचिय दिशा में सुदूर फंसी हुई है।




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