कल्याण ईयर ५ | Kalayan Year 5

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Kalayan Year 5 by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हूँ के फप् संख्या १४४ ाह्वान । (पं० घल्देवप्रसाद सिश्, एम०ए० , पुल-एल« बी ०,एम० आर ए० एुख०) '” १७१ १४६ रासनवरित्र शिक्षासार । (श्रीनन्दकिशोरजी मा 'किशोर' कान्यती थे) १७६ १४७ बैंदेही-विलाप | (पं ० रमाशंकरजी मिश्र “श्री पति”) २०१ १४८-'ाराध्य राम । (श्रीबालकृष्णुजी बलदुबा) २१२ १४१ राम नाम 1 (श्रीसोतीलालजी थोमरें) '”' २१७ १३० -शीरामचरितमानस-महिसा । (श्रीलों चनप्रसादजी पायदेय) ' स्धष १९१ तुलसी दाससे । (श्रीमोहनलालजी महतो 'वियोगी') . '*” र94 १५२ रामायण | (श्रीरामपलटसिंद 'मघुर' छम० एव, एम० शार५ ए५ एस ०) ६८4 १4 ३-दबुचर जो । (श्रीनासयसाचार्यजी शास्त्री वेदान्तभूषण) न १२४-राज्य । (श्रीसंविलीशरणजी गुप्त) सर ससप १५८ झादिकति बाह्मीकि | (ऐं० धीरामचरितजी उपाप्याय) र्स्द १२५: केसे झाऊँ द्वार । (श्री तरक्की) द०१ १५ ३नतुन्नसी। (श्रीअवन्तविदारीजी साथुर चिवस्स ) 2० $श-सक्तमावना । (श्री 'रसिकेन्द्र जी) २१३ १४-तुलसीवन्दना । (श्री योगेन्द्र शर्मा) ३२१ १६८-रामायणक रचयिता ] (कु० श्रीप्रतापनारायणज़ी पुरोहित क्िरत्न) ३२२ १६१ तुलसीस्थूति | (पं ० श्रीशान्तिप्रियजी द्विवेदी? ३२३ १६२ रासकया सुरजों क-नसैनी । ( पं० लचमीचन्द्जी श्रोचिय ) '** डम १६३ -पतितोद्धारक तुलसी 1 (पं० शरपेसनारायणजी न्रिपाडी 'प्रेस ) '' 2325 १द४-राम | (पं० गंगादिप्शुजी पारटेय, चिद्या भूषण 'विष्गु') डध२ १६४३ -रामचरितमानस-कवि तुलसी । (श्रीविन्दु अह्मचारीजी ) ** गा झभ्ष १६६ -मानसकी महत्ता । (विद्यार्थी श्रीमदेशप्रसादजी मिश्र 'रलिकेश') ३६८४ १६७-राम। (पं० भगवती प्रसाइजी शिपाठी विशारद एम० ए०, एल-एल-बी ०) ** एड पृष्ठ सेर्यां १६ ८- रामजन्सकी प्रतीक्षा ( श्रीमालादीनजी शुक्त, साहित्यशास्त्री, काच्यभूषगा ) *** छ१७ $८ ४ -रसने (भक्ति-गान) । (कवीन्द्र 'रसिकेन्द्रजी ) ४२४ ५७० लुलसी-काव्य । (श्रीदामों दरसहायसिंहजी 'करविकिकर' एल ० दी०) *** भडडे, 4८१ - दोनों खोकों का पन्‍्थ | (श्री झजुनदासजी केडिया) ४४२ ५७२ --बरसाये देत । (पं० जगज्ञाथप्रसादजी ट्िबेदी) ४ #८ १७६: तुझे भ्रपंण करे । (श्रीताराचन्द्जा परइया बी० ए० “चन्द्र ) कर १७४- घराथना . ('क्चिन) ्कच्ड संग्रहीत (६ उ-समायण । (महात्मा राँघीजी) जि 4७६ -रामचन्दर मंगल करें । (स्व० पं ०साघवप्रसादजी मिश्र मी सुदर्श न-सस्पादक) डक न १७७ रासायणकी विशेषता । (कविसच्रादू श्रीरेवीन्द्रलाथ ठाकुर) १८ ९७८-रामायणसे स्वाध॑परनाका नागा | (स्व० श्रोवड्लिमचन्द्र चढ़ोपाध्याय) १८ १७६-रामायरमें गेलिदासिक लघ्य 3 ( डा एच डदल्यू० बेज्ञी, सी ० एस० छाई ०) १8३ १८०-रामायण सर्वा्य सहाकाव्य हैं ! ,सोरीखिया) २१० इ८१५- रामायणसे उच्च भावोंका प्रादुर्भाव । ( झीफिय--समायणके झनुवादक ) रह इद९- रामायणर्म रस । (विघ) ' *** र३३ १८६ -रामायणुस परम्पर सहानुभूतिकी बूद्धि । (म्रीव्स ) २७० ३८४ -रामायणसंकीर्तनमा ला पद ! हब १८४ - संक्षिप्त रामचरितमाला पथ । (श्रीमन्नटेश्चर यौगीन्ट्रजी) **' ''' श्न् इ८र-रामाययकी शोर अधिक झाकपण (नेन्नसन -निश्वकोप रघपिता) 4८७: रामायया नेसरिक काव्य है | (झोमन: इस्डियन पपिक्सके रचयिता) ' स्‍६४ बस: रामायण सगूया ईश्वर | (डा० सर जाज॑ ग्रियर्सन) * न हर १८६- झमर कान्य ) ः (स्वर्गीय जश्ट्सि डी० बी० शेपसिरि श्रयर) 1६०५--राम अटल रहे। (मददात्मा गाँघीजी) ४५४२ $8१-रामचरितमानस 1(.. ,, हु... हर १8 २- श्रीराम-नामस | (1. द हनी डा पे सै के




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