सम्रधिशाली अजरबेजान | Samradhishali Ajarbejan

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Samradhishali Ajarbejan by ममेद - Mamed

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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रू २७ प्रतिशत, हरी चाय की पत्तियों का लगभग २०० प्रतिशत, प्र गूर का ४० प्रतिशत, भ्रौर सब्जी का १०० प्रतिशत बढ़ गया । बुल कृपि क्षेत्र जो १६४३ में ११,०६,००० देवटर था, हे में १२,४ंद,००४ हैतटर हो गया 1 मवेदियों वी सर्या पाच वर्षों में १,७६,७०० भ्धिव हो गयी । इसमें गायों की सस्या में £५,७०० को वृद्धि हुई । मास का उत्पादन (दोरों के गल्वों की सस्या-वृद्धि को देखते हुए) ६३ प्रप्तिपत, दूध का ६४ प्रतिगतत, अंडो बा ७० प्रलियत झर ऊन दा २० प्रतिशत बढ़े गधा । उन थी वृद्ध के भन्तगत, महीन उन शभ्रौर भ्ाधी महीन ऊर्न की किस्मों से लगभग २०० प्रतिशत की वृद्धि हुई । इूषि के विकास पर १६५२-१६५६ के बीच कुल शाज्य-व्यय २ पर्व रूदल टुपा । सिचाई प्ौर जल-निवासी पर वडी-वडी घन-राशिया एर्च की गयी है । ६६ जिलों मे जहा सिचाई पर कृषि होती है, नहरों वी कुल सम्वाई ४५,००० मीटर है प्ौर जल-निवासी थी प्रग्याली हे, ००० मीटर सम्वी है । सिंचाई धर जल-निवासी का सचें इनसे ही घटूत जल्द पूरा हो जाता है । वपास बी प्रति हेवटर उपज शभ्रव १६२० सी सुसना से लगभग ६ गुनी भ्रेधिव है । भ्रेनाज, सम्बाड, अंगूर भौर भ्रन्य फलों तथा रेशम के कोगे वी उपजों में वृद्ध हुई । पथुजनित पदार्थों वा उत्पादन भी बढ़ गया है । भजरवैजान वी इषि बी थे उपलब्धिया भर्थतत्र की इस सासा को तेजी गे उन्नत करने के लिए बम्पुनिर्ट दार्टी द्वारा निर्धारित बारंवाईयों पर अमल बरतने बा नतीजा है । ये कार्रवाईया निम्तलिगित है. राग्य दर इपि बी उपजो वी ररीदारी के दामों में दृद्धि , सामूहिक इपका के निजी भर्थनत्र में से राज्य बी. वसूलियों वा दिलवुल साहा, सामूहिर पार्मों की मशीनों में बडी वृद्धि, घ्रगुदा उत्पादन घौर प्रविधि बसियों वो कूपिडोत में भेज बर उसे धवित प्रदान करना, भादि ।




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