महाराणा यशप्रकाश | Maharana Yashprakash

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
16 MB
कुल पष्ठ :
500
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)महदाराणायणप्रकाय | (५)
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भ गीत वापाके समयका वना इआ नहीं प्रतीत होता किसी
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भ टीका-महाराणा वापाने अपने? प्रवजाका मर्यादा नहीं | दे
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उ५ सूमिकों अपने वठसे जातला ॥ १ ॥ दे अतुल चलशालोा
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+ तन मारियाका नाद करडाला । है गावल . तन ६ रामचन्द्रका
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“| और अपने वठसे पचास कोटि योजन पृथ्वी छेठी ॥ है ॥ द
१) १० दा हजार गामाक पति गहठोत वंश वापाने अनेक
2 गढ़ और गढ़ृपतियाका गये गजन किया अथांतू जीतलिये ।
3 और समुद्रॉंके पार नहीं गया मानों रामवाणकी जो मर्यादा |
2 हे उसके इस पारही रहा नहीं तो वापा समस्त भूमण्डल के
रे ठता | भाव यह हू कि वापाने पचास कोटि योजन भमिहीनरन
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दे दापावराटटनटटररपरापा सा पद गर्ल न ग्क्ग्क्क््कू

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