सच्ची शिक्षा | Sachchi Shiqsaa

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
श्रेणी :
Sachchi Shiqsaa by मोहनदास करमचंद गांधी - Mohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about मोहनदास करमचंद गांधी - Mohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )

Add Infomation AboutMohandas Karamchand Gandhi ( Mahatma Gandhi )

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
९ तीसरा काल २२. सोलहसे पच्चीस वषके समयको मैं तीसरा काल मानता हूँ । अुस काकमें प्रत्येक युवक और युवतीको अुसकी जिच्छा और स्थितिके अनुसार शिक्षा मिले । २३. नो वषके बाद आरंभ हनेवाली शिक्षा स्वावलम्बी होनी चाहिये । यानी विद्यार्थी पढ़ते हुआ असे अुयोगोंमें ठगे रहें, जिनकी आमदनीसे शालाका खच चले । २४. शालामें आमदनी तो पहलेसे ही होने लगे । किन्तु शुरूके वषोमें खचे पूरा होने लायक आमदनी नहीं होगी । २५. दिक्षकोंको बड़ी-बड़ी तनखाहें नहीं मिल सकतीं, किन्तु ये जीविका चलाने लायक तो. होनी ही. चादियें । शिक्षकमें सेवाभावना होनी चाहिये । प्राथमिक शिक्षाके लिअे कैसे भी दिक्षकसे काम चलानेका रिवाज निन्‍्दनीय है । सभी शिक्षक चरित्रवान होने चाहियें । २६. शिक्षाकें लिभे बड़ी और खर्चीठी जिमारतोंकी - ज़रूरत नहीं है । (२७. भंप्रेजीका अभ्यास भाषाके रूपमें ही हो सकता है. और अुसे पाम्यकममें जगद मिलनी चाहिये । जेसे हिन्दी राष्ट्रभाषा है, वेसे ही भंग्रेजीका अपयोग दूसरे राष्ट्रों साथके व्यवहार और व्यापारके छिभे है 12 ज् 0 ने स्त्री -दिक्षा २८. ल्ियोंकी विशेष शिक्षा कसी और कहाँँसे शुरू हो, जिस विषयमें मैंने सोचा और लिखा है, तो भी जिस बारेमें किसी निश्चय पर नहीं पहुँच सका हूँ । यह मेरा दृढ़ मत है कि जितनी सुविधा पुरुषको मिलती है, अुतनी ख्रीको भी मिलनी चाहिये । और विशेष सुविधाकी ज़रूरत हो, वहाँ विशेष सुविधा भी मिलनी चाहिये ।




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now