नासिकेतोपाख्यान | Nasiketopakhyan

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Nasiketopakhyan by नारायण जी - Narayan Ji

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(८) # नासिकेत-भाषा # शुद रतः 25१2:द५ हद लि 2. १५३५३९११३६ की ननेलललललललललललिकलफिटॉलिरलनिलिलललललवायकपिनियकनिययकिक कि यामी ही | इनकी छौँह न पावईुँ देखन # इनते नर्‌कछू चहुर विशेषन ॥ | सुनत वचन भइ विकल सहेली क सूखि गई दाघी जबु बेली ॥ || | महिपी भवन गई तब सोई % वंदि चरण पद गहि बहु रोई॥ | । दोहा-तब्‌ रानी कह चकितहि, कहु कन्या निज बात ॥ | |. खेद खिन्न छवि छीन मुख,कस तबहदयकँंपात॥८॥ | | चौ ०सुनत वचन बोली करजोरी # विनती बहुविधि कौन बहोरी॥ || कहेहु अभय जो पावहुँ माता के तो निज सकलसुनावहुँबाता॥ || | रानी कहेहु अभय तोहिं दीना के भाषु यथारथ सब छल हीना॥ | | सुनत वचन करि विनय बहोरी ## सूख वदन बोली कर जौरी ॥ | | सुनिय मातु कहि जात सुनादीं # अति अचरज सुनि रोम उठाहीं | देव दूचुज गंघधव तमीचर # यक्ष नाग चारण विद्याचर ॥ | 1 इनकी गति नहिं मंदिर जाके # कहियमजुजकेहि विधितेहिताके | | बाहिर. राजसुभट बढुतेरे क भीतर कन्या लाखक नेरे ॥ | दोहा-सतमहलाविचकुमरितव, रदतिसखिनसैंगनित्य | |... तदपि देव वद्च गर्भके, चिह्न देखियत सत्य॥९॥ | । चौ०सुनत वचन कन्याके रानी क सूित सूमि गिरी अदुलानी॥ | 1 विकल विहाल विलोकि सददेली # पवन कीन जंघा शिर मेली ॥ | बहुत जतन कारि मूछां जागी क बहुविधि शोच करनपुनिलागी | 1 कन्यहि कीनबिदा तब रानी # आपु गई रघुतट अकुलानी॥ | | चरण वेदि बहु विनय सुनाई क मांगी अभय रही शिर नाई ॥ | कहा भूप मन तजहु गलानी के दीन अभय सांची कहुरानी॥ | | सुनत रुदन करे वचन उचारा क लखा भूप कु भयडड बिगारा॥ | .. | कहेउ राउ पुनि कहसि न वाता क बोली तवभयकंपित गाता ॥ || | दोहा-चन्द्रवती राउर सुता, कुछ कक मइ सोइ ॥. | ।..... देव अजाने गम तेहिं,मा यह अचरज होइ॥१०॥ | | चो सुनतवचननृपवडु दुखमाना # भयो वाम विधि में मन जाना | || हो पापिन कत कौन कुकरमा क# मेटि वेदपथ तजि निजघरमा॥ ||




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