सामाजिक अर्थ साहित्य तथा पार्टीकारणम | Samajik Arth Sahitya Tatha Partikaranm(1954)

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Samajik Arth Sahitya Tatha Partikaranm(1954) by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(रि४) पोसद्दो करवानुं पचखाए, इच्छेहउत्तमंपोसहं, साव्वं सावज्जजागं पचचरूखाण, करेह, सु तत्थंआयारं, घम्मेश्ञाणं घरेद, पंचपरमेहिसरिखर्य तेमे भवतु॥२॥। पोसढ़ो पारवानो प्रकार. पारोमि पोसहं, अण्णाणेणवा, पमादेणवा, अमत्यभावेणवा पोस- हम्मि, जंकिंपि सुत्तत्यं, आयारंण कयंते, तस्सामिछामि दुकढं ॥ रै॥। न+प>थ००मे-थठ9८०क02०वनाणाण




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