अप्पर | Appar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अप्पर था व्यवहार ७मुस जीवित रहते ही दे रहा है मरणातुल्य कप्ट प्रभु दया करो मुझ पर, और इससे मुवित दो ।मैं,युगों मे तुम्हारा भक्त हूंकितु,इस वात से अनजानतुम रप्ट हो मुझसेऔर इस मरणातक पीडा का भागी बना रहे हो ।तालाव के किनारे खडेउन चौकीदारों से असावधान । जिन्होंने मुझसे कहा,प्रेरित किया--गइस तालाव मे कूद पटो,सैरो औरइसकी गहराई का अनुमान वरो'-- मैं कूद पडा हूं इस जलाशय मे । और अच मुझे चहूकिनारादियायी नही देताजहाँ मेरे पैर टिक सके ।ऐसे शब्दमैंने पहले कभी नही सुने थे । मुझे याद नही किक्व मैं मुल गया थाजल, फूल और धूप से तुम्हारी पुजा-अचना करनामुझे एसे किसी अवसर कीयाद नहींजब मैंन तमिल मेंतुम्हार लिए मधुर गीत नहीं गाये ।”




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