अप्पर | Appar

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Appar by बन्मीकनाथन - Vanmikanataan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अप्पर था व्यवहार ७ मुस जीवित रहते ही दे रहा है मरणातुल्य कप्ट प्रभु दया करो मुझ पर, और इससे मुवित दो । मैं, युगों मे तुम्हारा भक्त हूं कितु, इस वात से अनजान तुम रप्ट हो मुझसे और इस मरणातक पीडा का भागी बना रहे हो । तालाव के किनारे खडे उन चौकीदारों से असावधान । जिन्होंने मुझसे कहा, प्रेरित किया-- गइस तालाव मे कूद पटो, सैरो और इसकी गहराई का अनुमान वरो'-- मैं कूद पडा हूं इस जलाशय मे । और अच मुझे चहू किनारा दियायी नही देता जहाँ मेरे पैर टिक सके । ऐसे शब्द मैंने पहले कभी नही सुने थे । मुझे याद नही कि क्व मैं मुल गया था जल, फूल और धूप से तुम्हारी पुजा-अचना करना मुझे एसे किसी अवसर की याद नहीं जब मैंन तमिल में तुम्हार लिए मधुर गीत नहीं गाये ।”




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