सहारीय जनजाति के विभिन्न शैक्षिक स्तरों के प्रतिभाशाली बच्चों के सामाजिक - आर्थिक स्तर तथा विद्यालय समायोजन का कम उपलब्धि के सन्दर्भ में अध्ययन | Sahariy Janajati Ke Vibhinn Shaikshik Staron Ke Pratibha Shali Bacchon Ke Samajik - Aarthik Star Tatha Vidyalay Samayojan Ka Kam Upalabdhi Ke Sandarbh Men Adhyayan

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Sahariy Janajati Ke Vibhinn Shaikshik Staron Ke Pratibha Shali Bacchon Ke Samajik - Aarthik Star Tatha Vidyalay Samayojan Ka Kam Upalabdhi Ke Sandarbh Men Adhyayan by राजेश कंचन - Rajesh Kanchan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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इसप्रकार से स्पष्ट होता है कि संविधान को लागू हुए 54 वर्ष हो चुके हैं और समाजवादी जनतंत्र की सरकारों ने जनजाति समूहों की प्रतिभाओं के विकास के लिए व्यावहारिक सोच में आवढयक परिवर्तन नही किये हैं 1 परिणाम स्वरूप उनके समूह की प्रतिभाओं का विकास समाज विरोधी कार्यों की ओर मुड़॒ जाता है या फिर उनका हवास हो जाता है जिसे “कुन्द” दाब्द के रूप में कहा जा सकता है | दतिया प्रक्षेत्र पुराने बुन्देलखण्ड का सहाक्त क्षेत्र रहा है जिसमें निवास करने वाली सहारिया जनजाति के प्रतिभा सम्पन्न बच्चों का चयन हो, उनकी विशहोष हिक्षा हो ; ताकि वे अपनी प्रतिभा का समुचित विकास कर सके | प्रतिभाहाली हाब्द का अभिप्राय प्रतिभाह्ाली बच्चों पर कोई भी शोध कार्य उस समय तक पूरा नहीं माना जा सकता है जब तक इस छाब्द का अभिप्राय स्पष्ट न हो जाये । मानव विकास के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति अपनी बौद़िक भ्रमताओं तथा. योग्यताओं के कारण एक दुसरे से भिन्‍नता स्थापित करता रहा है | इस हेतु मनोवैज्ञानिकों ने बुद्ठि वितरण की उच्च सीमा तथा निम्न सीमा को निह्ठिचत किया है | बुद्डि की उच्च सीमा को मानसिक मेधा या प्रतिभाहाली माना गया है | प्रतिभाहाली व्यक्तियों की बुद्धि लब्धि 140 से ऊपर की मानी गयी है (छार्मा 1968) | मनो वैज्ञानिकों ने विट्िष्ट मेधावी व्यक्तियों का अध्ययन तीन प्रकार से किया है :- (1)... प्रतिभाद्याली व्यक्तियों की बुद्धि के प्राक्कलन द्वाटा जो वर्षों पहले हुए थे, (2)... बचपन से लैकर प्रौढ़ावस्था तक के मेधावी बच्चों के कार्यों के मूल्यांकन ट्वारदी, (3)... विद्यालय मैं पढ़ने वाले अति उत्कृष्ट बच्चों की समस्याओं के अध्ययन द्वारा (मार्गन - 1966) ग




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