श्री श्री 1008 श्री द्रौपदां जी महाराज का जीवन - चरित्र | Shri Shri 1008 Shri Draupadan Ji Maharaj Ka Jivan - Charitra
श्रेणी : धार्मिक / Religious

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
230
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(: डे 2)
दया का देरदा ..उपदेश . दा! _ नयज्ुर, जमाने को ।
23
भर रहा ज्ञान के रत्ना,से “र” दिल के खुज़ाने को 11911
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औओपधि '“झौ” खिलाता है किसब दु य् दृर् दो जायें ।
-परमपद “प” दिलाता है -कि..चन्थन चूर.दो जायें 01 ,
.ि” ऊदता दैग्मदिसा घर्म का! पालत किया करना |
7 द*) फदता है पराई ददें में तन सी दिया ऋरना ॥ह॥
“यही चपदेश है “शा का मेसे की श्ोन पर अरेलां ।
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कह रहा “बिन्दु” ऊपर का विपय की घाराना ' स्यागो ' 1
भलाई कर चलो जग को जगाशों और पद जागो 1४
_ जेन सिद्धान्त, चीणा के यह मीठे तार् हैं सातो )
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जाये जो कोई इनको ये करते पार. हैं _सातों ॥६॥)
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