नीहारिका | Niharika

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Niharika by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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चारण का गीत भाई रण को चला, बहिन ! तुम रना-वेधन लागो तो | हैंस-रैंस तिलक करो, जब जाये गीत विजय के गाथो तो । ओर चले जाने पर दश-सेविका धार ते पग-पंग पर ऑाहत वीं बनकर प्र्‌ करुणाजल बरसाश्रो तो । रज्जुद्दीद है पोत, वीर है सैकट में-सुन पाथी तो । सम से केशों को अपने लेकर र्जु बनाओ तो । निकल॑-निकल कर. सरसिज-नयनी सुकुमारी सब पेरो में छाले किन्तु न तुम धवड़ाओ डे तो ७ हों तो




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