श्री किशनलाल जी अग्रवाल | Shri Kishanlal Ji Agrawal
श्रेणी : जीवनी / Biography

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5 MB
कुल पष्ठ :
177
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
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विशेष बक़नव्य, कारोबार करें या चिकित्सा--इससे कारो-
बार की ओर इनका ध्यान कम रद्द जाना स्वाभाविक ही था । इनके यहाँ
वहुत से आदमी काम करते थे । इनकी गैर हाजरी में वे वेकार
समय काटने लगे । कारोबार को झधिकाधिक धक्का लगता गया ।
यहाँ तक कि कुछ समय बाद इन्हें कई दजार रुपये का चुकसान नजर
आने लगा । इन्हें बहुत चिन्ता हुई । अब उन्होंने प्राक्कतिक न्विकित्सा
की बात तक न करने का निश्चय किया । ये सारा ध्यान अपने कारोबार
में जगाने लगे । इस पर घाटा दिन-दिन पूरा होकर और भी लाभ
हो गया ।
छात्र इन्होंने फिर चिकित्सा कायें की ओर ध्यान देना शुरू किया ।
कई रोगियों को अच्छा किया । ये सोचने लगे कि मैं जो रोग रूपी
सृत्यु के मुह से निकला हूँ तो दूसरों को आरोग्य का संदेश सुनाने
व्औौर रोग-मुक्त करने के लिए ही हूँ । इन्होंने प्रतिज्ञा की कि ठीक हो
जाने पर कारोबार छोड़कर अपनी शेष वायु भर फेवल चिकित्सा का
ही कार्य करूँगा; और अपना निजी पचीस हजार रुपये लगा कर श्रपने
जन्म स्थान श्री माधोपुर में निश्शुल्क सेवा करूंगा । देश का विभाजन
होने और पाकिस्तान बनने से इनकी इस योजना पर भयझ्लर आघात
हुआ | इनकी सारी सम्पत्ति वहाँ दी रद्द गयी; और ये अपने परिवार
के साथ जैसे-तैसे यहाँ आ सके । ऐसी दशा में प्राककतिक चिकत्सा
के काम में अपनी निजी रकम लगा कर सिश्शुल्क सेवा करने की वात
ही नरही । तथापि इस कार्य में इनकी रुचि और लगन वनी रहदी ।
व ये डाक्टर हैं, प्राकृतिक चिकित्सा करते हैं । इसका परिचय आगे
सिंनेगा 1
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