बुंदेलखंड के धार्मिक लोकगीतों का सांस्कृतिक एवं सांगीतिक अनुशीलन | Bundelkhand Kay Dharamic Lokgeeto Ka Sanskritik Avam Saangeetik Anusheelan

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Bundelkhand Kay Dharamic Lokgeeto Ka Sanskritik Avam Saangeetik Anusheelan  by उपेन्द्र कुमार तिवारी - Upendra Kumar Tiwari

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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शनै: - 2 उत्तर दिशा की ओर ऊँचा होता गया है। उत्तर दिशा में विन्ध्य पर्वत क्षेत्र की पर्वत मालायें हैं। दीवान प्रतिपाल सिंह जी द्वारा रचित छंद इन नदियों के सीमंकनका साक्ष्य है। 'उत्तर समतल भूमि , गंग जमुना सुबहति है।। प्राची दिशि कैमूर सोन काशी सुलसति है।। दक्खिन रेख विन्ध्याचल तन सीतल करनी | पश्चिम में चम्बल चंचल सोहति मन हरनी | | तिनि महि राजे गिरि वन, सरिता, सरित मनोहर | कीर्ति स्थल बुन्देलन को बुन्देलखण्ड वर || ' बुन्देलखण्ड के नामकरण के विचारों में उसका नाम जेजाभुक्ति था ऐसा विचार विभिन्‍न विद्वानों का रहा है। जैजाक मुक्ति का सीमा विस्तार श्री केशव चन्द्र मिश्र ने निम्न प्रकार से बताया है, ” उत्तर की ओर गंगा और यमुना महानद इसकी सीमा बनाते थे | दक्षिण में नर्मदा नदी जिसमें मालवा भी सम्मिलित था, और पश्चिम मे इसकी सीमा सामान्य रूप से चम्बल नदी थी, जो कि विन्ध्य मेखला तक पहुँचती है। जेजाक भुक्ति की पूर्वी सीमा इतनी स्पष्ट नहीं रखी जा सकती | ...... उत्तर पूर्व में सेन नदी सीमस्थ थी, किन्तु दूसरा दक्षिणी भाग चन्देल साम्राज्य में घुस गया था, यदि _ बनारस के एक अंश पूर्व की देशान्तर रेखा, को सीमा मान लिया जाय तो कुछ अनुचित नहीं होगा । इधर जैजाक भुक्ति की सीमा प्रतिहारों की पूर्वी सीमा से भी पार गई थी जैजाक भुक्ति की स्थिति .... इस प्रकार है। मानिचित्र पर 220 और 260 अक्षांश तक 75 और 84 पूर्वीय भू रेखाओं के मध्य में हैं ..... इस पूरे क्षेत्र का क्षेत्रफल. 51000 वर्ग मील था ।” 2 “नर्मदा एवं चम्बल की सभ्यता विद्वानों के अनुसार बहुत पुरानी समझी जाती है किन्तु महाभारत ... जनपद काल में इस भूभाग को चेदि जनपद से सम्बोधित किया गया है। जिसका समीकरण पार्टीजर ने वर्तमान बुन्देलखण्ड से किया है। (1)बुन्देलखण्ड दर्शन, मोतीलाल त्रिपाठी- पृष्ठ सं0 26 .... (2) बुन्देली लोक सहित्य - डॉ0 रामस्वरूप श्रीवास्तव पृष्ट सं0 3. .... (3008




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