सचित्र हिन्दी व्याकरण | Sachitra Hindi Vyakaran
श्रेणी : भाषा / Language

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
1 MB
कुल पष्ठ :
37
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No Information available about विद्यासागर बृहद्वल - Vidyasagar Brihadval
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(९)
तुलना या अवस्था--षक वस्तु को किसी से बढ़ कर या
सब से यद कर बताना ।
(१) भूलावस्था या स्वरूपावस्था--ष्क वस्तु की पहिली
अवस्था को कहते हैं नखे “” अधिक ”
(२) उत्तरावस्था-'प्क वस्तु को किसी से वद कर बताना,
जखे अधिक से “ अधिकतर ”'
(३) उत्तमावस्था--प्क वस्तु को सब से बद कर बताना,
लैसे अधिक से ” अधिकतम”
क्रिया--जिस पर कर्ता का काम नि्भर हो, प्रायः पद के
अन्त में 'ना' जुड़ने से बनती है, जैसे- खाना, खेलना ।
सकर्मक--कर्म वाली क्रिया को कहते हैं, जैसे- * राम राठी
खाता है” यहां ' रोटी” कर्म है, इसल्यि ' खाना ' क्रिया
कर्म वाली दोने से सकर्मक है।
अकर्मक--बिना कर्म वाली क्रिया को कहते हैं, जैसे ' राम
बैठता है. यहां कोहे कर्म नदीं है, इसछिये ' बैठना ' क्रिया
अकमंक है ।
दिकर्मक--ढा कर्म वाली क्रिया को कहते हैं, जेसे ' खाना?
से ' खिलाना ' (राम लक्ष्मण को रोटी खिलाता हे )
त्रिकर्मक--तीन कर्म वाली क्रिया को कहते हैं, जेखे ' खाना!
से * खिलवाना ' ( राम लक्ष्मण को भ्रस्त से रोटी
खिलघाता है )
कर्सपूरक--घाक्य में कर्म के होते हुए भी यदि क्रिया का भाव
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