राष्ट्र भारती | Rastra Bharati
श्रेणी : साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
14 MB
कुल पष्ठ :
508
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)# सैंम्पादकाचार्प दादूराव विष्णु पराडकर केनंदरन्न्दसनुपनिसनसपसमसन्मंथर
रोक लिया और आज” निकालनेकी योजना वेनायी ।
मजी सन् १९२० से श्री वाबूसाव “आज के प्रकाशनकी
ब्यवस्थामें लगें । जिसी सिन्सिलेमें आप लोकमान्य
लिलकमे मिलने भी गये थे । निलकसे आपकी यहीं
अन्तिम मूलाकान थी । दनारसभें स्वयसेवक रुपमें,
कलक्तामे पत्रदार रूपमें और पूनामें जेक नये समारम्भके
प्रसगमें आप मुनसे मिले । निलककों श्री वादूराउजी
असम समय अपना राजनीतिक मुस् मानते थे ।जिसी वर्ष जन्माप्टमोके दिन 'आज'का प्रयमअर्क प्रकाशित हुआ और श्रो बाबूरावजी श्री श्री काशके
साथ सवुकत संम्पादक बनाये गयें। जिस समय तक
बायुरावजी अपनी देशभवित, श्रॉन्तिकारी भावनाओं,
गुप्त समिहियोंसे सम्बन्ध आदिके वारण काफी प्रसिद्ध
हो चुके थे । आज के सम्पादक रूपमें तो आपने देयमें
राष्ट्रीयताकी अँसी लहर फीडायी कि “आज ओर
पराडकरनी समानाधंक हो गये । सन् १९२० से लेकर
सन् १९५३ तक थोडमे समयके अतिरिक्त आप निरन्तर
“आज के सम्पादफके सूपमें कार्य कर रहे है ! “आज के
स्वरूपनअकनके जन्मदाता आपही है। आप ही हूं
अूसके पालक पोपक और जनताके हृदयमें अुसका
प्रतिध्ठापन करनवाले । आपने जद 'आज'का सम्पादन
प्रारम्म किया तो गान्घीजीका अुदय हो रहा था भौर
झुसीषें अक दो वप बाद देशमें स्वाघीनतावा आन्दोलनछिद गया । पराडवरजी गास्यीजीके भक्त बने और
राष्ट्रको विदेशी आाधिपत्यमे मुक्त करानेके लिये अपनों
लेखनीसे जनताके विचा रो में त्रास्तिकी भावन। भरने लगे ।आपकी भक्ति, अन्वभित ने थो । जिसीका परिणाम
था कि अनेक प्रस्योपर आपने गान्धीजीकी आलोवनाभी की । आपने 'आज' में वाँप्रेसगे वार्षिक अधिवेशनमें
अध्यक्यीय पदसे दिया गया प्रराका पूरा भाषण प्रकाशितकरनेकी व्यवस्था की । सन् 'र३ और हे० के स्वदेशीआन्दोलमके देशक कोने कोनेके समाचार छापने युरूकिये । देमन-चक्रमें पीसे जानेवाले तथा देशतवी स्वाधी-सताके निमित्त बलिदान होनेवाले देशमक्तोरे समाचारझापके 'आज'में छपते थे । यही नहीं, अग्रतेख बौरटिप्पणियो द्वारा आपने देधकों, देखकी जनताका ओरटूदेगके नेताओका मार्गदर्शन किया । कॉप्रेस तथा अुसके
सूचघार गान्वीजीने अेकदार नहीं अनेकवार “आज के
परामर्थानुसार ही आन्दोलनकी घारा मोदी और
अननमें विजयी हुआ ।राजदोहका मुकदमाजापपर कओ बार राजद्रोहका मुरुदमा चला
ओर कभी वार पत्रसे जमानत सागी गयी । भुस समय
बर्मामि मण करनेवाले बाबा राघवरदासका ओके लेख
छापनेके लिअे आपपर मुकदमा च5। और छह मासको कैद
अथवा १००० रु० जुर्माना देनेकी आज्ञा हुआ । आपने
जेल जाना ही पसन्द किया था बातें कि घरका सामान
आदि कुक वे करवा बदिकारियोसे भाश्वासन मिले
जाओ । तत्कालीन दनारसके जिला मजिस्ट्रेट श्री ओवेनने
सिने प्रवारका आरवासन देनेसे शिकार किया । अुधर
श्री पक्राशजी आदिकी सलाह भी यही हुऔ कि जुर्माना
दे दिया जाअ । यह घटना सन् १९३९ औस्वं।की है।'रणभेरी' का प्रकाशनसन् १९३० में राष्ट्रीय आदोलनके समय 'आगे'
मे जमानत माँगो गयी । सरकारी आईिनेत्सके विषद्ध
पराइकरडीने पत्र बन्द ही करना अूचित समझा । पर
देशमें स्वाघीननाका संग्राम चल रहा था । जनता नथां
नेताओको राष्ट्रीय आन्दोलनकी गतिविधिसे जाप्ररिचित
रखना भी सम्भव न था । जिमीलिजे आपने “आजके”
समाचार बुलेटिन साजिक्टोस्टाजितपर लिवाले । जबें
सरकारने जिसे भी जन्द करनेगी आज्ञा दी हो रणमेरी'
नापकी गुप्त पत्रिका आप निकालते रेहे। यह पत्रिका
जनतामें प्रसिद्ध हो गयी थी । पुलिस परेशान थी पर
लाचार थी । भुसकों सारी दौडबूप और छानेनवीर
ब्यर्य जानी थी । अक दिन च्चीमें श्रद्धय पराइकरजीसे
मेने पूडा कि आप लोग पुलिसको नजरंसि केसे बच
निदल्ते थे, ठी आपने बताया कि यदि हमारी लिपि
और लिखावट देखकर पुछिस चाही तो हमें ताल
पकड सती थी । पर यह बात जुर्सके ध्यानमें
बआायी ही नहीं । “लाज' के पुव प्रकाशनपर आपने
राष्ट्रीय आादोरनके समाचार ही प्रमुलतासे प्रकाशित
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