श्री हर्ष | Srii Harsh

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Srii Harsh by श्री आत्माराम जी - Sri Aatmaram Ji

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श् शी हप गया और दूसरे दोनों पुरुपंनि राजा की नौकरी करली, बाण कविने पुप्पर्भात का; इतना ही इतिहास दिया है । इस के पश्चात्‌ इस वंश में अनेक राजा हुए परन्तु उनका इतिहास अभी तक माप जगत नहीं हुवा । इ. स. ६०५ में जब प्रभाकर वधन गद्दी पर बैठा तब से फिर बाण ने इस वंशका इतिहास दिया है | प्रमाकर बधेन को “* प्रतापशीरू * भी कहा जाता था ) पंजाब के गान्घार ( पंशावर ) और साकरु ( स्याठकाठ ) में राज्य करने वि हुण कोगों को उसने हराया था ! सिन्ध के राजा तथा राजपूताना के गुजर राजा को भी उसने पराजित किया । मालवा तथा छाट ( भरुच ) के राजाओं पर भी उसने विजय प्राप्त की ४ उसकी पत्नी का नाम यशोवति ( यक्लोमति ) था । एक समय जब राजा तथा रानी सो रहें थे तब -ााााययल्‍यल्‍एल्‍एयटणणपणणट न, + छूणहरिणकेसरी . सिन्पुराजज्वरा. गुर्जरपजागरों गान्धारधिपगन्धद्धिपकूटपाककी. लाटपाटलपाटचरी. मालक ल्क्मीठता परझु इृष चारित )




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