ईरान प्राचीन और नवीन | Iran Prachin Aur Navin
श्रेणी : इतिहास / History

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutRahul Sankrityayan
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
25.14 MB
कुल पष्ठ :
221
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)अ्रीरान प्राचीन ्रारम्मिक कातत औरान देशके मुख्यतः तीन भाग हे । दक्षिणमें समुद्रके तटका भाग बहुत गर्म है। बीचमे अँचा औरानी मैदान है जो तीन हजारसे ५ हजार फीट तक अँचा है । जिस अँचाओऔके कारण यह प्रदेश अधिक ठण्डा है और चारों ओर अँचे पहाठोसे घिरा होनेसे यहाँ बादलोके आने-जानैका मार्ग अवरुद्ध है। जिसीलिअे यहॉपर वर्षाकी कमी है। यह मेदान तेहरानमें जहाँ समृद्रतलसे तीन हजार फीट अूँचा हें वहाँ दक्षिणके शीराज और उत्तर-पद्चिमके तब्रेज नगरमे चार हजार। जिसके दक्षिण-पुर्वका अिलाका केरमान ५ हजार फीट अँचा है। अत्तरी भागमे गीलान और माजेन्दरानके प्रान्त है जो कस्पियन समुद्रके तटपर होनेके कारण अधिक हरेभरे तथा ३३५९-३६ अक्षाशपर होनेसे सर्द भी हे । जिनके अतिरिक्त चौथा भाग आजुर्बाजिजानका प्रान्त भी कहा जा सकता है जो काकेशस् कोहकाफ पवत-श्इंखलाका एक भाग है। जितिहासपर दृष्टि डालनेसे जान पठता हैं कि औरानमें सभ्यताका विकास सर्वे-प्रथम समुद्रतटके दक्षिणी भागमें हुआ था। यहाँके लोगोपर बाबुल और असुर सभ्यताका असर पहले पठा था । जिस वक्त मध्यका अँचा मेदान अधिकतर खानाबदोदशों और चरवाहोका चरागाह बना हुआ था अस समय भी यहाँके लोगोंने कृषि और नागरिक जीवन स्वीकार कर लिया था । लेकिन वह जाति जिसने जिस देदाको औरान नाम दिया और जिसका

User Reviews
No Reviews | Add Yours...