सूदखोर की मौत | Soodakhor Ki Maut

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Soodakhor Ki Maut by सदरुद्दीन ऐनी -Sadruddin Annie

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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डू ह सचमुच कसकर बांधे पगड़ी के पेच : को देखनेते मालूम होता था, कि न जाने कितने समय में अपने गन्दे हाथों को पोछते हुए उसने उसको तेल में भिगोकर बहुत गन्दा कर दिया हूँ 1 ः पणड़ी बढ़ाकर बेकार कपड़ा बबाद करनेसे क्यो फायदा (प्रश्ठ १९) मैंने सोचाः इजाम अच्छी तरह “जानता हैं, कि एक पंगड़ी . चाहे कितनी ही बड़ी हो, सेकिंन बह खू'टीं को नहीं तोड़ सकती. ।' शायद उसने . कोरी कों खू'टीपर पगड़ी रखने का मौका इसलिये नहीं दिया, कि उसकि . जगने से उसके बहं रखे झपने कपड़े पर्दे हो. जाति । ी ठुड




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