श्री हनुमन्नाटक | Shri Hanumannatak
श्रेणी : काव्य / Poetry, साहित्य / Literature

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
66 MB
कुल पष्ठ :
301
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्रथमाक 3 १
दोहा।
नीतोयज्ञतिद्दीसमें;, जनकदूतकंहब
सयास्वयबरलतह: पगधार हपरेभाता ३६
॥ श्राविश्वाभत्रजाकाबचन ।
कवित्त-रामठश्मनजूसों वोठकद्योकुलपून्यआयोहिप्र
मानहैतिजनककेजाइहों । जोकहोतोराजादशरथजूपे
पहुंचाउंनहीं संगचलोतुमेंकोतुकदिखाइरों ॥ छोटीसी
कछोटी कटे घनहीनमोटीकर चोटीघरकद्योनेकरोंह
तो चढाइहों । राजातिजनमकऋषिराजते मैं पायोगुण ऐसे
शिवजीके धनुषहूतेगुणपाइदों ॥ ३० ॥ चढेजातसुख
देत फूढेफूलतोरठेतऋषिसंगर्वारनकीशोभायर भांति
है। किधोदिवन्रयी किधों पोरुषकीजडेनइेकिघोवीचमे
रुइतउतदिनरातहे ॥ किधाराविसेंगनवनीरद्अनंगकी
तरंगगंगयमुनसरस्वतीपरातहे । देखरूप गेठकीछुगाई
जेदुरा राभसंगउठटाई नफिराइफिररीजातहे ॥ ३८ ॥
आयगयेजनककेदेशमेंनरेशमुत्त ऋषिकेसनेतेराजाओआ
मेठेनआयोंहे। पोडशोपचारकरपूजाकुटपूज्यहूकी मन
वचकरमचरणझीशंनायोहे ॥ पाछबूझीकोनकेकुमार
ताततेरसंगसुंदरसपरतकेसुनतसखपायोहे । चडियेशुर्सा
टघामदीजियेवडाइमोटि यहेदुचिताइधनुकाहूनचढायो
है ॥ ३९ ॥ बोल्योराजषिराजागिनियेकहांठोंगुनदे
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